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पुराने स्वरूप में लौटेगी गोंची नदी, डेढ़ हजार श्रमिक बहा रहे पसीना

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महोबा। मझगवां बांध से निकली गोंची नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए 14 ग्राम पंचायतों के डेढ़ हजार श्रमिक पसीना बहा रहे हैं। 35 कि लोमीटर लंबी इस नदी पर भूजल स्तर बढ़ाने को जगह-जगह रिचार्ज पिट (एक मीटर गहरे गड्ढे) भी बनाए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक से समूची योजना की जिले से लेकर शासन स्तर पर मॉनीटरिंग की जा रही है।
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मझगवां बांध से निकली गोंची नदी पुरवा जैतपुर, मंगरौल, बुधौरा, महेबा, कुटरा, थुरट, छितरवारा, भुजपुरा, महुआ इटौरा, दादरी, तेईया, खेरौकलां, उमरई, मड़वारी, लौलारा होकर धसान नदी में जाकर मिलती है। गोंची नदी को अपने पुराने स्वरूप में लाने के लिए डीएम मनोज कुमार ने एक माह पहले निर्देश दिए थे। सभी 14 ग्राम पंचायतों में तालमेल का काम बीडीओ राहुल पांडे को सौंपा गया।
इस कार्य में जैतपुर व पनवाड़ी विकासखंड की 14 ग्राम पंचायतों से होकर निकली गोंची नदी की साफ-सफाई में हजारों श्रमिकों को रोजगार मिला है। नदी से झाड़ियों की सफाई के साथ मरम्मत व खोदाई का काम भी कराया जा रहा है।
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अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी विनय सोनी ने बताया कि नदी में प्रत्येक 10 मीटर के बाद रिचार्ज पिट का निर्माण कराया जा रहा है। 35 किलोमीटर लंबी नदी में 30 मीटर लंबा, 15 मीटर चौड़ा व एक मीटर गहरा गड्ढा किया जा रहा है। सैकड़ों की संख्या में ऐसे रिचार्ज पिट बनने से इन गड्ढों में दिसंबर तक पानी भरा रहने की उम्मीद है।
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