महोबा। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में छह वर्ष के अंदर 93 चहेते लाभार्थियों को दो-दो बार किस्त भेजे जाने मामले में सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारियों समेत 11 लोगों के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन का मामला दर्ज होने के बाद मामले से जुड़े लोगों में खलबली मची है।
खातों में भेजी गई दोहरी किस्त में से 55 लाख रुपये की धनराशि वापस हुई, लेकिन डिमांड ड्राफ्ट समय पर जमा न करना अधिकारियों व कर्मचारियों के गले की फांस बन गई। वापस हुई धनराशि के ड्राफ्ट डिसऑनर हो गए और शेष बचे 79 लाख रुपये की वापसी के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।
वर्ष 2016 से शुरू हुई शहरी आवास योजना का जिले में लखनऊ की एक प्राईवेट कंपनी के कर्मियों ने सर्वे से लेकर चयन और धनराशि उपलब्ध कराए जाने तक की प्रक्रिया पूरी कराई। जिसमें 93 लाभार्थियों को दोहरी किस्तों में धनराशि खातों में भेज दी। मामला संज्ञान में आने पर बैंकों को लिखापढ़ी करके खातों में रोक लगाई गई और वापस हुए 55 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट भी बनवा लिए लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर धनराशि जमा नहीं कराई। जिससे डिमांड ड्राफ्ट डिसओनर हो गए, उस पर भी गौर नहीं किया गया।
शेष धनराशि की वापसी भी नहीं हो सकी। तत्कालीन परियोजना अधिकारी सुरेंद्र नाथ के सेवानिवृत होने पर चार्ज डिप्टी कलेक्टर सौरभ पांडेय को मिला। जांच के दौरान 1.34 करोड़ रुपये से अधिक का गबन का मामला सामने आया। जिसके बाद प्रभारी डूडा अधिकारी व अतिरिक्त एसडीएम सौरभ पांडेय ने सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारी सुरेंद्र नाथ, सेवानिवृत्त एपीओ अबरार अहमद समेत 11 लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में गबन का मामला दर्ज कराया।
आवासों में धांधली की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपी भूमिगत
महोबा। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में 1.34 करोड़ के गबन का मामला दर्ज होने के बाद डूडा कार्यालय में तैनात प्राईवेट कंपनी के अधिकांश कर्मचारी भूमिगत हो गए। शनिवार को कार्यालय में सीएमएम के अलावा हाल ही में तैनाती पाने वाले तीन ऑपरेटर काम पर आए।
कलेक्ट्रेट में संचालित डूडा कार्यालय का नजारा बदला दिखा। 18 से अधिक लखनऊ की प्राईवेट कंपनी के तैनात कर्मचारियों की भीड़ नहीं दिखी। शिकायत लेकर पहुंचने वाले लाभार्थी भी नजर नहीं आए। अधिकांश आरोपियों के मोबाइल नंबर भी बंद रहे। वहीं डिप्टी कलेक्टर सौरभ पांडेय भी अवकाश पर चले गए।
पीएम आवास योजना में हुआ वसूली का बड़ा खेल
महोबा। प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्रों को पात्र बनाकर गरीबों का हक डकारने का खेल शहरी इलाके में पूरे छह साल चला। अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर पक्के मकान, वाहन व नौकरीपेशा वालों को भी आवास स्वीकृत कर दिए।
शहर के भटीपुरा में एक ही संयुक्त परिवार में चार-चार आवास स्वीकृत किए तो सरकारी नौकरी करने वालों और सेवाआश्रित परिवार के पहले से पक्के मकान होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। चर्चा है कि पूर्व में तैनात रहे एपीओ अबरार अहमद ने एक विशेष जाति समुदाय को योजना से सर्वाधिक लाभ पहुंचाया। इस काम में दूर के रिश्तेदारों ने योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जमकर वसूली की।
छह वर्षों में स्वीकृत हुए 14601 आवास
जिले में वर्ष 2016 से 2021 के बीच शहरी इलाके के नगर पालिका परिषद महोबा, चरखारी और नगर पंचायत कुलपहाड़, कबरई व खरेला में कुल 14,601 आवास स्वीकृत हुए। जिसमें से दस हजार लाभार्थियों को पहली किस्त दी गई।
6,386 लाभार्थियों को दूसरी और करीब चार हजार लाभार्थियों को तीसरी किस्त दी गई। स्वीकृत आवासों में से तीस फीसदी पात्रों को एक भी रुपये न भेजे जाने से धांधली उजागर हो रही है। योजना के तहत प्रथम किस्त के रूप में 50 हजार, दूसरी किस्त में डेढ़ लाख व तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है।
वित्तीय धन का दुरुपयोग गबन की परिधि में आता है। जवाबदेह लोगों की लापरवाही सामने आई है। जिम्मेदार प्राइवेट कंपनी के कर्मियों को हटाने और कार्रवाई कर धन वसूली को लिखा गया है। कहां और किस नगरीय इलाके में आवास योजना में धांधली की गई है उसकी भी जांच होगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
जुबैर बेग, एडीएम नमामि गंगे व प्रभारी डूूडा अधिकारी