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देखरेख न होने से उजड़ा नेहरू पार्क

Sun, 11 Jan 2015 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
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मदन सागर के तट पर सचीश चंद्र सक्सेना उर्फ बती बाबू ने वर्ष 1989 में अपने नगर पालिका अध्यक्ष कार्यकाल में नेहरू पार्क बनवाया था। पार्क के चारों तरफ बाउंड्री और दोनों तरफ लोहे के गेट लगवाए थे, पार्क  में झांसी से मंगाकर अलग किस्म के सुंदर फूल और पौधे लगवाए थे। जिन पौधों ने बढ़कर आज पेड़ों का रूप ले लिया है। लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद नगर पालिका अध्यक्षों ने पार्क की देखरेख की सुध नहीं ली। जिससे धीरे-धीरे पार्क पूरी तरह उजड़  गया। नतीजतन अब यह पार्क आवारा जानवरों का अड्डा बन गया है। पार्क के गेट गायब है वहीं बाउंड्री जगह-जगह से टूट गई है। जहां कभी लोग सुबह शाम पार्क में सुंदर रंग बिरंगी लाइटों के साथ मखमली घास और सुगंधित गुलाब के फूलों की खुशबू का आनंद लेते थे। पार्क में सुबह से  शाम तक सैर करने वालों की खासी भीड़ जुटती थी। पार्क और पेड़  पौधों की देखरेख करने के लिए नगर पालिका में तैनात माली को पार्क में तैनात कर दिया गया था। जो आज अपनी विरानी के कारण आवारा जानवरों का अड्डा बना हुआ है।
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विदेशी सैलानी भी लेते थे पार्क का आनंद
नेहरू पार्क में पेड़ पौधों में लगी रंग बिरंगी लाइटें पार्क की खूबसूरती में चार चांद लगाती थीं। मदन सागर के तट पर ऊंचाई में बने पार्क तालाब के कारण बेहद खूबसूरत नजर आता था। जहां विदेशी सैलानी भी पार्क की खूबसूरती देखने आते थे। वहीं पार्क की सुंदरता देख पार्क को बुक किया जाता था।


नेहरू पार्क को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई उपयोगिता समिति में नेहरू पार्क को सुंदर बनाने के लिए टेंडर डलवाने की पहल की गई थी। जिसे बाद में एजेंडे से अलग कर दिया गया। अब बोर्ड बैठक में नेहरू पार्क के सुंदरीकरण के लिए प्रस्ताव पास कराने का प्रयास किया जाएगा।
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- पुष्पा अनुरागी, चेयरमैन नगर पालिका परिषद महोबा।
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