सेवायोजन सभागार में अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां लोगों को कुपोषण से बचाव के तरीके बताए गए। कार्यशाला में एएनएम, आंगनबाड़ी, आशाएं और ग्राम प्रधानों ने भाग लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी एसके वार्ष्णेय ने कहा कि ग्राम प्रधान, एएनएम, आंगनबाड़ी और आशा बहुएं गांव-गांव में पोषण दिवस का आयोजन कर बच्चों को कुपोषण से बचाने के बाबत जानकारी दें। सीएमओ ने कहा कि समुचित आहार न मिलने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं इसलिए आंगनबाड़ी में मिलने वाला पोषाहार बच्चों को नियतिम खिलाएं। उन्होंने कहा कि एएनएम प्रत्येक गर्भवती महिलाओं की खून और पेशाब की जांच, रक्तचाप और वजन की जांच करें। उन्होंने कहा कि पांच साल तक के बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराया जाए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों की सूची उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी रामेश्वर पाल ने बताया कि 1 नवम्बर 2014 से पूरे प्रदेश में राज्य पोषण मिशन का गठन किया गया है , जिससे कोई भी गर्भवती महिला, किशोरी एवं बच्चा कुपोषित न रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास, पुष्टाहार विभाग संयुक्त रुप से प्रत्येेक गांव में ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस का आयोजन करें। इसमें आंगनबाड़ी सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का वजन करेंगी। चिकित्सा अधीक्षक डा0 जीआर रतमेले ने बताया कि प्रत्येक एएनएम को रक्तचाप मापना, पेशाब की जांच करना, बच्चें का वजन करना आना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। कुपोषण से बचाने के लिए बच्चों के खानपान पर ध्यान दें। इस मौके पर उपचिकित्साधिकारी डा0 बालचंद्र, नवीन, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी चतुर सिंह, नवीन, नेहा चंसोरिया ने भी विचार व्यक्त किए।