महोबा। उत्तर प्रदेश के जनपद महोबा के मोहल्ला मलकपुरा निवासी गयाप्रसाद तिवारी के घर दिवाली की खुशियां दोगुनी हो गई है। इस परिवार ने नौकरशाही में नया कीर्तिमान बनाया है। उनके तीनों बेटे आईएएस हैं।
अब उनकी आईएएस बहू अलका तिवारी को झारखंड सरकार में मुख्य सचिव बनाया गया है। अलका तिवारी के पति देवेंद्र तिवारी झारखंड में ही मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर तैनात हैं।
मोहल्ला मलकपुरा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक गयाप्रसाद तिवारी के तीन बेटे हैं। दो बेटे अलग-अलग राज्यों में मुख्य सचिव रह चुके हैं। अब बहू अलका तिवारी झारखंड राज्य में मुख्य सचिव नियुक्त की गईं हैं। जो इस परिवार की तीसरी मुख्य सचिव हैं। इसके पहले दूसरे नंबर के बेटे राजेंद्र कुमार तिवारी यूपी के मुख्य सचिव रहे हैं।
अलका का वर्ष 1988 में बिहार राज्य के लिए आईएएस में चयन हुआ था। इसके बाद झारखंड में उन्होंने सेवाएं दीं। केंद्र सरकार में सचिव रहीं और अब उनको झारखंड का मुख्य सचिव बनाया गया है। गयाप्रसाद तिवारी के पहले नंबर के बेटे डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी बिहार राज्य में मुख्य सचिव रहे हैं।
दूसरे नंबर के बेटे राजेंद्र कुमार तिवारी यूपी सरकार में वर्ष 2020 में प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं। सेवानिवृत्त के बाद उन्हें केंद्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। तीसरे नंबर के बेटे धीरेंद्र तिवारी वर्तमान में पंजाब सरकार में अपर मुख्य सचिव है। उनके चचेरे भाई रविंद्र तिवारी वर्ष 2009 बैच के आईआरएस पद पर हैं। जो दिल्ली सरकार में डिप्टी कमिश्नर के पद पर आसीन हैं।
पिता गयाप्रसाद तिवारी ने इसके लिए सभी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के आशीर्वाद से उनका परिवार कामयाबी पर पहुंचा। चचेरे भाई राजीव कुमार तिवारी ने बताया कि पूरा परिवार इस उपलब्धि से खुश है। घर में बधाई देने वालों का तांता लगा है।
शिक्षा जीआईसी ललितपुर से ग्रहण की
महोबा। शिक्षक गयाप्रसाद तिवारी के बड़े बेटे डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी ने कक्षा छह से इंटर तक की शिक्षा जीआईसी ललितपुर से ग्रहण की। जनपद इलाहाबाद से बीएससी करने के बाद उन्होंने केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस और एमडी किया। वर्ष 1995 में वह लखनऊ में ही डॉक्टर बन गए।
इसके बाद वह नौकरी छोड़कर महोबा आ गए और आईएएस की तैयारी की। वर्ष 1986 में आईएएस में चयन होने के बाद बिहार कैडर में झारखंड राज्य मिला। कई जिलों में डीएम रहने के बाद मुख्य सचिव बने। तीन साल पहले वह निर्वाचन आयुक्त रहे। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें दोबारा निर्वाचन आयुक्त बनाया गया। जो वर्तमान में पदस्थ हैं।
कानपुर आईआईटी से बीटेक
महोबा। शिक्षक गयाप्रसाद तिवारी के मंझले बेटे राजेंद्र कुमार तिवारी ने कक्षा छह से इंटर तक की ललितपुर में ग्रहण की। जनपद कानपुर से आईआईटी पास करने के बाद बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद पहले प्रयास में ही वह आईएएस बने। उनकी देश में तीसरी और उत्तर प्रदेश में पहली रैंक आई। राज्य चुनने का विकल्प मिला। विभिन्न जिलों में डीएम रहने के बाद वह कमिश्नर रहे। वर्ष 2020 में यूपी के मुख्य सचिव बनने के ढाई साल बाद वह सेवानिवृत्त हो गए। अब केंद्र सरकार ने उन्हें कई राज्यों का मार्गदर्शक बनाया है। जो केंद्र व राज्य के बीच समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं।
आईआईटी रुड़की में चयन
महोबा। शिक्षक गयाप्रसाद तिवारी के सबसे छोटे बेटे धीरेंद्र कुमार तिवारी ने ललितपुर जिले से ही इंटर तक की शिक्षा ग्रहण की। इसके आईआईटी रुड़की में चयन होने के बाद उन्होंने आईईएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 1994 में वह आईएएस बने। उन्होंने पंजाब कैडर मिला। वर्तमान में वह अपर मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत है और मुख्य सचिव की कतार पर हैं।
पहली बार में ही आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण
महोबा। मूलरूप से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून निवासी अलका तिवारी ने वर्ष 1988 में आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वर्ष 1990 में उनकी शादी उत्तरप्रदेश के महोबा निवासी डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी के साथ हुई। उन्होंने पहली बार में ही आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। वह बिहार कैडर में आईएएस रहीं। इसके बाद केंद्र सरकार में दिल्ली चली गईं। जिसमें सरकार के अधीन कई विभाग में केंद्रीय जनजाति सचिव, नीति आयोग में सलाहकार समेत विभिन्न पदों पर रहीं। अब उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया है।