महोबा। चरखारी के जयेंद्र नगर निवासी हेमेंद्र सिंह यूक्रेन शुक्रवार को सुबह वह अपने भाई के घर बांदा पहुंच गए। उनका कहना था कि उन्होंने फिल्म में दिखाए जाने वाले सीन असल में देखे हैं। मन में काफी नकारात्मक विचार आते थे।
हेमेंद्र के भाई ज्ञानेंद्र सिंह बांदा के शेखतलैया अलीगंज में रहते हैं। हेमेंद्र 24 फरवरी से खारकीव में मिसाइल अटैक से शुरू हुए युद्ध का मंजर किसी फिल्म का सीन नहीं, मेरे साथ बीत रही लाइव कहानी है। शुक्रवार को वतन वापसी पर घर पहुंचने के बाद मुझे अपने तिरंगा की ताकत का पूरा अहसास हो चुका है। यहां घर आने के बाद अपने माता, पिता और भाई की नम आंखों को देख कर मुझे साफ दिखाई दे रहा था कि वहां खारकीव में युद्ध क्षेत्र में तो मैं फंसा था लेकिन मेरे परिवार को यहां से युद्ध का पूरा मंजर दिखाई दे रहा था। आज घर में अपने आप सही सलामत देखकर मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझता हूं।
घर पहुंची अंशिका, परिजनों के चेहरे खिले
यूक्रेन-रूस में छिड़ी जंग के बीच फंसी छात्रा अंशिका सकुशल अपने घर पहुंच गई। आलमपुरा निवासी सुरेश सिंह वर्तमान में फर्रुखाबाद जनपद में चकबंदी अधिकारी के पद पर तैनात हैं उनकी पुत्री यूक्रेन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गई थी। फरवरी में जैसे ही हालात खराब होने की जानकारी हुई तो अंशिका ने परिजनों से घर वापसी की इच्छा जताई। फ्लाइट का किराया अधिक होने के कारण उसे इंतजार करना पड़ा और अचानक यूक्रेन पर रूस का हमला भी हो गया। यूक्रेन के हालात लगातार खराब हो रहे थे ऐसे में उन्हें भी डर सता रहा था लेकिन सरकार ने पहल की और उन्हें वापस घर आने को मिला है। अंशिका बताती है कि वह उजग्रोथ यूनिवर्सिटी में थी। वहां से 240 भारतीय छात्र पांच बसों से हंगरी बॉर्डर पहुंचे। उन्हें नौ घंटे तक फंसे रहना पड़ा। यूक्रेन में उन्हें सबसे ज्यादा खाने-पीने की व्यवस्था के लिए परेशान होना पड़ा। वहीं अभी भी पनवाड़ी के ग्राम प्रधान संजय द्विवेदी का पुत्र राज द्विवेदी हंगरी सीमा पर फंसा हुआ है।