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छलका दर्द: ट्रांसपोर्ट बंद, कैसे पहुंचे 1200 किमी. दूर पोलैंड बॉर्डर

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हेमेन्द्र सिंह से वीडियो कॉल पर बात करते परिजन। - फोटो : MAHOBA
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महोबा/ चरखारी। रूसी हमले के बाद जिले के दो छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। जिससे छात्रों व उनके परिजनों ने भारत सरकार से वापसी के लिए गुहार लगाई है। वहीं, फंसे छात्र ने अपना दर्द बताया कि ट्रांसपोर्ट बंद है, 1200 किलोमीटर दूर पोलैंड बॉर्डर कैसे पहुंचे।
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चरखारी के जयेंद्र नगर निवासी हेमेंद्र सिंह खारकीव में फंसे हुए हैं। रविवार को परिजनों ने वीडियो काल पर बात की। माता-पिता ने कहा कि बेटा किसी तरह आप भी पोलैंड बॉर्डर पहुंच जाओ और वहां से वतन लौट आओ। हेमेंद्र ने बताया कि इंडियन एंबेसी उन्हें कह रही कि पोलैंड, स्लोवाकिया या हंगरी बॉर्डर तक पहुंच जाओ, वहां से ले आएंगे। हमारे पास न गाड़ी है और न ही ट्रेनें चल रहीं। ईस्ट यूूक्रेन में फंसे छात्रों को सही सलामत निकालने के लिए भी तो कोई स्पेशल प्लान बनाना चाहिए। भारत सरकार के लिए यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की सर्वप्रथम समस्या है कि भारतीय दूतावास ने भारतीय छात्रों को पोलैंड या हंगरी जैसे देशों के बॉर्डर पर पहुंचने के लिए कहा है, जबकि यूक्रेन के शहर खारकीव से बॉर्डर की दूरी 1200 कि. मी. है। पब्लिक तथा प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पूरी तरह बंद हो चुके हैं तो फिर 1200 कि. मी की दूरी कैसे तय किया जाए? जहां रास्ते में मिसाइल, गोला-बारूद और गोलियां चल रही हैं। दूसरी समस्या वहां के शासन तथा कॉलेज प्रशासन के द्वारा छात्रों के मिसयूज किए जाने की संभावना को लेकर है। ऐसे जंग के माहौल में उन्होंने छात्रों को यूनिवर्सिटी से बाहर निकालने की धमकी देते हुए छात्रों को अपने देश से निकलने नहीं दिया और जंग के बीच में भी क्लास जारी किए हुए थे।
तीसरी समस्या भारतीयों के साथ हो रहे दोयम रवैया का है। वहां की सरकार और वहां की जनता भारतीयों को कोई भी सुविधा देने से इंकार कर देती है और यहां तक कि खाने-पीने का सामान भी पहले वहां की यूक्रेनियन जनता को दिया जाता है। बाद में भारतीयों को दिया जा रहा है। जंग के पहले ही दिन से भारतीयों के डेबिट कार्ड से कैश निकालने की सुविधा बंद कर दी गई है।
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28 तक कीव में लगा है कर्फ्यू
पनवाड़ी ग्राम प्रधान संजय द्विवेदी का पुत्र राज भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। जहां पर कीव के एक बंकर में हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि रविवार को उनकी बात दोपहर 3.30 बजे बेटे से हुई तो बताया कि यहां पर 28 फरवरी तक के लिए कर्फ्यू लगा हुआ है। फिलहाल यहां धमाके अब कम ही सुनाई दे रहे हैं। जैसे ही सरकार कोई मदद करेगी तो हम लोग भी अपने देश के लिए प्रस्थान करेंगे।
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