महोबा। चुनाव में रोडवेज बसों की ड्यूटी का भी अपना अर्थशास्त्र है। इसमें पब्लिक की जेब मनमाने तरीके से कटती है, जबकि जिस डिपो से जितनी बसें जाती हैं उसकी उतनी ही भरती है। कमाई के चक्कर में रोडवेज के अधिकारी मांग के मुताबिक भरपूर बसें भेजने को हर समय तैयार रहते हैं। उन्हें पब्लिक की समस्या से कोई लेना देना नहीं होता। कई बार तो आयोग को यह भी नहीं बताया जाता कि इस रूट पर एक भी बस नहीं बची है। दरअसल चुनाव आयोग एक बस के लिए डिपो को प्रतिदिन 24,081 रुपये का भुगतान करता है। अब जिसकी जितनी बसें जाएंगी उसकी उतनी ही कमाई बढ़ती है। रोडवेज से सूत्र बताते हैं कि यदि बसें चुनाव में न लगी होतीं तो एक बस को औसत सात से 10 हजार रुपये की ही कमाई होती है। महोबा डिपो से 19 बसों को विभिन्न जिलों में भेजा चुका है। इसकी कमाई प्रतिदिन 10 लाख रुपये से बढ़कर 15 लाख तक पहुंच गई है।
121 बसें लगीं चुनाव ड्यूटी में
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के रोडवेज बेड़े में 394 बसें हैं। 10 फीसदी बसें तकनीकी खराबियों से वर्कशाप में खड़ी हैं। 254 बसें ही चल रही हैं। इनमें से बांदा, हमीरपुर, राठ और महोबा डिपो से मंगलवार तक 121 रोडवेज बसें कम हो गई हैं। ये सभी बसें पहले चरण का चुनाव कराने और माघ मेला में यात्रियों को लाने ले जाने के लिए गैर जनपद भेजी गई हैं। विभिन्न रूटों से बसों की लगातार कटौती से यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
जगह-जगह यात्रियों का जमावड़ा
मंगलवार को बसों की कमी को लेकर रोडवेज बस अड्डे पर पड़ताल की गई। इसमें पाया कि चुनाव ड्यूटी में लगी रोडवेज बसों की कमी से यात्रियों को परेशानी हो रही है। शहर और कस्बों के बस अड्डों के अलावा विभिन्न रूट पर अघोषित बस अड्डों पर भी यात्रियों का जमावड़ा लगा है। सहालग की वजह से बसों के लिए अफरा-तफरी और मारामारी है। डग्गामार वाहन मनमाना किराया वसूल रहे हैं। यात्रियों को असुरक्षित ढंग से बैठाकर जोखिम भरी यात्रा करा रहे हैं। बस स्टैंड में भीड़ बढ़ने से चोर उचक्के भी सक्रिय हैं। यात्रियों का बैग, पाकेट आदि साफ कर रहे है।
यात्री बोले
भरूआ सुमेरपुर निवासी अमित कुमार ने बताया कि डिपो में काफी देर से बस का इंतजार कर रहे हैं। एक बस आई और चली भी गई, लेकिन चढ़ नहीं पाए। बसें ठसाठस भरी जा रही हैं। मौदहा निवासी मो. उमर ने बताया कि वह पनवाड़ी से आए हैं। जिस बस में आए उसमें पैर रखने की जगह नहीं थी। अब यहां भी बस का इंतजार कर रहे हैं। बसें चुनाव में गईं हैं, जिससे दिक्कत हो रही है।
इन रूटों पर ज्यादा दिक्कत
बांदा में फतेहपुर, कानपुर, महोबा, हमीरपुर रूट की बसों की किल्लत है।
महोबा में हमीरपुर, कानपुर, छतरपुर, लखनऊ, दिल्ली रूट की बसें नहीं हैं।
हमीरपुर में कानपुर, लखनऊ, जालौन महोबा, बांदा, हरपालपुर और छतरपुर की बसों का संकट है।
अधिकारी बोले
यात्रियों का भी ख्याल रखा जा रहा है। जिन मार्गों की बसें भेजी गई हैं वहां शेष बसों के चक्कर बढ़ा दिए गए हैं। -अशोक कुमार क्षेत्रीय प्रबंधक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
बसों की कमी है, लेकिन अन्य बसों के फेरे बढ़ाए गए हैं।
हेमंत मिश्रा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, महोबा