उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले के दूसरे दिन भी जन
सैलाब उमड़ा। आल्हा मंच आल्हा गायन की धूम रही। कजली मेला मंच पर दीवारी
नृत्य कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। मेला परिसर में दूरदराज से आए बड़े
झूलों का भी बच्चों और महिलाओं ने आनंद लिया।
कजली मेले के दूसरे
दिन तेज धूप और गर्मी के बाद भी लोगों की सड़कों पर भीड़ देखती ही बन रही
थी। मेले तक पहुंचने में लोगों को धक्का मुक्की खानी पड़ी।
मेले
में सबसे ज्यादा भीड़ ग्रामीण क्षेत्रों की थी। शहर की सभी सड़कें मेला
प्रेमियों से खचाखच भरी रहीं। ग्रामीणों ने मेले में बुंदेली कार्यक्रमों
का आनंद लिया। लोगों ने काला जादू देखा तो महिलाओं और बच्चों ने झूले का
आनंद लिया।
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने मेला परिसर से
एक-एक किमी की दूरी पर चारों तरफ बैरियर लगाकर सील कर दिया, जिससे कोई भी
बड़ा वाहन शहर के अंदर न आ सके। मेले में पैदल आने-जाने वालों की भीड़ के
चलते डीआईओएस कार्यालय के समीप जाम लग गया।
करीब डेढ़ घंटे तक जाम
लगा रहा। जाम खुलवाने में पुलिस को करीब डेढ़ घंटा लग गया। ट्रैफिक पुलिस
ने कलेक्ट्रेट और राठ रोड पर बैरियर के काफी आगे वाहनों को रोककर व्यवस्था
बनाई और धीरे धीरे लोगों को निकलने दिया।
पुलिस प्रशासन द्वारा
बड़े वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए किए गए इंतजाम भी देर शाम नाकाम साबित
हो गए। शाम को मेले से लौट रही भारी भीड़ और सामने से आने-जाने वाले
वाहनों के चलते जाम लग गया।
रात करीब पौने आठ बजे मेला परिसर से
व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौट रहे पुलिस अधीक्षक केके गहलौत भी जाम में फंस
गए। चालक सायरन बजाता रहा लेकिन भीड़ धीमी गति से चलती रही।