नहर नहीं, यह सड़क हैः करीब एक किलोमीटर लंबा जलभराव का नजारा, जबकि सड़क के दोनों ओर सीमेंटेड नाला बना हुआ है।
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लाखों की लागत से तैयार कराई गई नवीन गल्लामंडी का संचालन अव्यवस्था के चलते दो वर्ष से अधर में लटका है। महकमे ने बिजली जोड़ने के लिए एक वर्ष पहले अवगत कराया। फिर भी बिजली नहीं जली। इससे व्यापारियों का कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा है।
खरेला की नवीन गल्लामंडी तीन वर्ष पहले बनकर तैयार हो गई थी। कस्बा समेत जुड़े 23 गांव के किसानों को इस मंडी के संचालन से उपज के क्रय विक्रय की सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन गल्लामंडी का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। मंडी और बिजली विभाग के बीच पचड़े में फंसी संचालन व्यवस्था की ओर अधिकारी भी गौर नहीं कर रहे है। क्षेत्र के किसानों को मुस्करा और चरखारी की गल्ला मंडियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
नवीन गल्लामंडी के संचालन की राह में विद्युत विभाग की शिथिल कार्रवाई रोड़ा बनी है। चरखारी गल्लामंडी में तैनात सचिव खरेला प्रभारी विशंभर त्रिपाठी के अनुसार गल्लामंडी संचालन के लिए आधा दर्जन पंजीकृत आढ़तियों ने सहमति पिछले वर्ष दे दी थी। मंडी में दुकानें भी आवंटित कर दी गई। अढ़तिया एक वर्ष से मंडी समिति का चार्ज भी अदा कर रहे है। विद्युत विभाग के जेई प्रवीण यादव ने बताया कि मंडी में बिजली के लिए प्रांकलन तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही बिजली जलाने की कार्रवाई पूरी कर दी जाएगी।