पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत से गुफ्तगू करते पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटो)
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महोबा। पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का विधानसभा चरखारी से गहरा नाता रहा है। वर्ष 1998 में जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कस्बा चरखारी आकर 300 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी थी। पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत से उनका अधिक लगाव था। यहीं वजह है कि उस समय गंगाचरण राजपूत जो भी कहते थे, वह काम हरहाल में होता था। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर भाजपा और अन्य नेताओं ने उनके सादगी भरे जीवन को याद किया।
पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें वर्ष 1993 में भाजपा की सदस्यता दिलाई थी। उन्होंने अपने पुत्र से भी ज्यादा प्यार और सम्मान दिया। वह मेरे राजनैतिक गुरु रहे। हमेशा कहते थे कि पार्टी कार्यालय को मंदिर समझो, कमजोर व वंचित तबके के साथ मिलकर उनकी परेशानी दूर करो। पूर्व मुख्यमंत्री हमेशा डायरी रखते थे और समस्याएं नोट करते थे। वर्ष 1998 में जब वह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने चरखारी आने से 15 दिन पहले उन्हें फोन किया और पूछा कि क्या मांगें हैं तो उन्होंने विकास कार्यों का खाका तैयार कर भेजा। चरखारी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कल्याण सिंह ने जिले को 300 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी और उनका पैसा उसी दिन रिलीज किया। जिसमें कलक्ट्रेट, स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय व अन्य विकास कार्य शामिल थे। वह कहते थे सिद्घांत और निर्णय पर अटल रहो। राज्यपाल रहने के दौरान वह अक्सर फोन करते थे और चुनाव के विषय में बातचीत करते हुए पिछले चुनाव में किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले, इसकी जानकारी लेते थे। उनका होमवर्क बड़ा मजबूत था। पूर्व मुख्यमंत्री वर्ष 2004 में पनवाड़ी व जैतपुर और वर्ष 2007 में पनवाड़ी व अजनर चुनाव के दौरान आए।
राज्यपाल रहने के दौरान लेते रहे विधानसभा की जानकारी
भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि वर्ष 2007 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह चुनावी सभा में कस्बा चरखारी आए थे। कार्यक्रम का संचालन उन्होंने किया था। तब कल्याण सिंह ने उनके सिर पर हाथ रखकर आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया था। राज्यपाल बनने के दौरान उन्होंने कई बार लैंडलाइन से फोन किया। एक बार महोबा से चरखारी जाते समय पूर्व मुख्यमंत्री का फोन आया। तब उन्होंने कार से उतरकर दूर बात करने को कहा। उन्होंने चुनाव को लेकर चरखारी विधानसभा की जानकारी और सभी पार्टियों की स्थिति पूछी थी।
जेल में भी कार्यकर्ताओं का ध्यान रखते थे बाबूजी
पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. कमलेश सक्सेना बताते है कि वर्ष 1989 में रामजन्मभूमि आंदोलन में जब वह बांदा जेल में निरुद्घ थे। तो वहां बाबूजी कल्याण सिंह भी साथ में थे। वह प्रतिदिन हर कार्यकर्ता के भोजन, स्वास्थ्य की जानकारी लेते थे और परेशानी हल करते थे। जब महोबा तहसील के पवा गांव में आपदा आई तो उन्होंने पार्टी फंड से दो लाख रुपये पीड़ितों को सहायता राशि दी थी।