चरखारी (महोबा)। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की यौमे-पैदाइश पर अजीमोशान जलसे का आयोजन गुरुवार रात को किया गया। मौलानाओं ने कहा कि इस्लाम हमेशा आतंकवाद के खिलाफ रहा है। मदरसों में देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जाता है। आजादी की जंग में मौलानाओं की भी हिस्सेदारी रही है। कहा कि तालीम इल्म की रौशनी देती है।
चरखारी के बुधवारी बाजार मैदान में गुरुवार रात मदरसा मदीना हिफ्ज जामा मस्जिद कजियाना के तालिब इल्मों (छात्रों) की दश्तारबंदी कर हाफिज की डिग्री दी गई। दस्तारबंदी के मौके पर फफूंद से आए आलिम सैय्यद अनवर मियां चिश्ती ने कहा कि कुछ लोग दहशतगर्दी फैला रहे हैं, लेकिन देश हमारे लिए पहले है। इसलिए हमें देश की सबसे बड़ी अदालत और संविधान का पालन करना चाहिए।
डेरापुर से आए आलिम मौलाना कारी अनफासुल हसन ने कहा कि यह हाफिज दुनिया में दीन की रोशनी से हिंदुस्तान में शांति का पैगाम देंगे। ऑल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल कानपुर से आए मौलाना हासिम अशरफी ने आपसी भाइचारे और सद्भाव का संदेश दिया था। संदल जाललपुरी ने नात पेश की कि ‘मेरे मौला की रहमत है, मेरी मां मेरी जन्नत है।’
शोएब रजा वारसी ने भी नात पेश कर मौला की मिन्नत की। इस मौके पर संभल से आए मौलाना युसूफ रजा, शहर काजी महोबा मौलाना कारी आफाक, शहर काजी चरखारी मौलाना शकील अहमद रजवी, मदरसा के कारी आरिफ ने दीन की तालिम, नमाज, रोजा के साथ मोहम्मद का पैगाम एकता कायम व सुप्रीम कोर्ट के फैसला पर शांति बनाए रखने की अपील की। दश्तारबंदी में शौकत, सुबालिहीन, शकील, इखलाक, सलमान, जफर अहमद बच्चों को हाफिजा पूरा करने पर अमामा बांधकर डिग्री दी।