अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। पूरी रात रेस्क्यू जारी रहा। सुबह करीब साढ़े तीन बजे उस समय घनेंद्र को बाहर निकालने की उम्मीद और बढ़ गई। जब रेस्क्यू टीम को घनेंद्र बोरवेल के अंदर पानी नजर आया। रेस्क्यू टीम इस दौरान करीब 27 फिट तक टनल बना चुकी थी। टीम के जवानों ने घनेंद्र के हाथ में रस्सी बांधने का प्रयास किया, लेकिन देखते ही देखते वह पानी डूब गया। इसके बाद जवानों ने कई बार उसे बोरवेल से निकालने का प्रयास किया, लेकिन हर बार नीचे से आ रहे पानी में गुम हो जाता था। जवानों ने बोरवेल से पानी का बाल्टियों और फिर पंप लगाकर पाइप से कई बार निकाला। इस दौरान बोरवेल के अंदर सूखे पत्ते, धसकती मिट्टी रेस्क्यू में बाधा पैदा कर रही थी। काफी मशक्कत के बाद गुरुवार की सुबह करीब 8.44 बजे टीम को 30 फीट की गहराई पर घनेंद्र नजर आया। जवानों ने फौरन उसके हाथ व पैर में रस्सी बांधी और फिर से बोरवेल से निकाल लिया।
--
पहली बार जिले में आए बोरवेल रेस्क्यू एक्सपर्ट
घनेंद्र को बोरवेल से निकालने के लिए लखनऊ से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की जो टीम आई थी। वह बोरवेल में फंसे बच्चों को निकालने की एक्सपर्ट है। इस बात की पुष्टि डीएम सत्येंद्र कुमार ने की।
डीएम ने बताया कि घनेंद्र नौ इंच चौड़े बोरवेल में गिरा था। इसकी गहराई 30 फीट थी। जिन तरह की परिस्थितियां थी उसमें ग्रामीणों और स्थानीय बचाव दल के लिए घनेंद्र को बोरवेल से बाहर निकाल पाना मुश्किल था। बचाव दल एनआरडीआरएफ के अफसरों से लगातार संपर्क में रहा। उनके निर्देशन पर बोरवेल के बगल में खुदाई और टनल बनाने का काम करता रहा। रात करीब 11 बजे लखनऊ से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम बुधौरा पहुंची। तब तक स्थानीय टीम रेस्क्यू में जुटी थी। आगे का मोर्चा लखनऊ से आई टीमों ने संभाल लिया। एनडीआरएफ की इस टीम में बोरवेल रेस्क्यू के प्रशिक्षित एक्सपर्ट शामिल थे।
----------
बंद कराए जाएंगे जिले में खुले पड़े बोरवेल
-डीएम ने लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन को निर्देश दिए
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। बोरवेल में गिरने से कुलपहाड़ के बुधौरा गांव में हुई घनेंद्र की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है। जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। डीएम सत्येंद्र कुमार ने जिले भर में खुले पड़े बोरवेलों की जांच के आदेश दिए हैं। इसकी जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन को सौंपी गई है। डीएम के निर्देश पर जिले भर में गांववार बोरवेलों का सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। साथ ही खुले पड़े बोरवेलों को बंद कराया जाएगा।
जिले का अधिकांश क्षेत्र डार्क जोन घोषित है। इसके बाद भी यहां अंधाधुंध तरीके से बोरिंग कराई जा रही हैं। कई बार बोरिंग फेल होने पर किसान बोरवेल ग़ड्ढे को बंद नहीं कराते हैं। यह गड्ढे अब जानलेवा बन गए हैं। इसको लेकर प्रशासन गंभीर है। गुरुवार को डीएम ने लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन को निर्देशित किया है कि जिले में बोरिंग के लिए कितनी एजेंसियां काम कर रही हैं। इसकी सूची तैयार की जाए। बोरिंग करने वालों के साथ बैठक की जाए।
डीएम ने बताया कि जिले में बोरिंग को लेकर लघु सिंचाई विभाग को गांववार सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इस सूची को संबंधित एसडीएम व एडीएम को सौंपा जाएगा। जिले में खुले पड़े बोरवेलों को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग की है।
--
प्रशासन देगा मुआवजा
बोरवेल में गिरकर मरे घनेंद्र के आश्रितों को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि राज्य आपदा मोचन निधि से एक-दो दिन में मुआवजा राशि घनेंद्र के परिजनों को दे दी जाएगी।
--
एक-दूसरे की सरहाना की
घनेंद्र के अंतिम संस्कार के बाद उसके बाबा कालीचरण कुशवाहा और एसडीएम मोहम्मद उवैस हुए। बातचीत के दौरान एसएडीएम ने घनेंद्र के परिजनों और ग्रामीणों के सब्र की दाग दी। वहीं, कालीचरण ने पुलिस, प्रशासनिक अफसरों और रेस्क्यू टीम की सरहाना की। कहा कि पूरी रात अफसर और टीम के लोग मेहनत से लगे रहे। यह बहुत है, घनेंद्र की जान नहीं बची। यह उनका दुर्भाग्य है।
--
इंसेट
दोपहर तीन बजे बंद हो गई थी मासूम की आवाज आना
दोपहर एक बजे बोरवेल में गिरे घनेंद्र की आवाज दोपहर तीन बजे आना बंद हो गई थी। बच्चे की कोई आहट न मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बोरवेल में पाइप डालकर उस तक ऑक्सीजन पहुंचाई। इसके बाद बच्चे में कोई हलचल नहीं हुई, तो परिजनों व ग्रामीणों का सब्र टूटने लगा था। पूरी रात भारी संख्या में गांव के पुरुष व महिलाएं घटनास्थल पर मौजूद रहकर घनेंद्र की सकुशला के लिए प्रार्थना करते रहे।
--
जिले में खुले पड़े हैं सैकड़ों बोरवेल, नहीं ले रहा कोई सुध
फोटो- कुलपहाड़ के लुहारी मौजे में खुला पड़ा बोरवेल
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। जिले में सैकड़ों की संख्या में बोरवेल ऐसे हैं, जो खुले पड़े हैं। यह बोरवेल हादसे का सबब बन सकते हैं। अब प्रशासन ने इन बोरवेलों को बंद कराने का बीड़ा उठाया है।
जिले के जैतपुर, पनवाड़ी समेत कई ब्लॉकों को डार्क जोन घोषित है। इसके बाद प्रशासनिक अफसरों की बिना अनुमति के किसानों के साथ अन्य लोग बोरिंग करा रहे हैं। कई बार पानी न आने पर बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है। ताकि, अगर कभी पानी नजर आए तो बोरवेल में समर्सिबल पंप डालकर पानी का इस्तेमाल किया जा सके। बुधौरा गांव की प्रधान सरोज कुमारी के प्रतिनिधि ओमप्रकाश का कहना है कि गांव में करीब 12 ऐसे स्थान हैं, जहां बोरवेल के खुले पड़े हैं। अगपर इन्हें जल्द बंद नहीं कराया गया, तो घनेंद्र की तरह और भी बच्चों हादसे का शिकार हो सकते हैं।
कुलपहाड़ संवाद के मुताबिक, क्षेत्र में भी कई बोरवेल खुले पड़े हैं। बोरिंग कराने वाले लोग और प्रशासनिक अफसर इन्हें बंद कराने की सुध नहीं ले रहा है। प्रशासन बोरिंग मशीन संचालकों और बोरिंग कराने वालों को चि न्हित करें। जहां बोरवेल खुले हो, वहां बोरिंग करने व कराने वालों पर कार्रवाई करे। तभी बोरवेल से होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा।
----------------------
खबरों से संबंधित फोटो परिचय
फोटो 03 एमएएचपी 15 परिचय-बुधवार की रात घटनास्थल पर डटे डीएम व अन्य अधिकारी
फोटो 03 एमएएचपी 16 परिचय-अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद एसडीएम व पुलिस फोर्स
फोटो 03 एमएएचपी 17 परिचय-खेत में बने बोरवेल को इस पत्थर से ढके था किसान
फोटो 03 एमएएचपी 18 परिचय-रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बंद कराया गया बोरवेल
फोटो 03 एमएएचपी 19 परिचय-बच्चे को निकालने के लिए इस जगह से बनाया गया था टनल, रेस्क्यू पूरा होने के बाद टनल और बोरवेल के गड्ढे को मिट्टी से भर दिया गया
फोटो 03 एमएएचपी 20 परिचय-शटरिंग के लिए आसपास के पेड़ों से काटी गई डालें