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आत्महत्या के लिए प्रेरित करने पर पति को सात वर्ष की सजा

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महोबा। दहेज की मांग को लेकर पत्नी को प्रताड़ित करने और फांसी लगने से मौत होने के छह वर्ष पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) राकेश कुमार गौतम ने बुधवार को फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने पर पति को सात वर्ष के कारावास व 36 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
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जनपद हमीरपुर के कछवाकला गांव निवासी कुंवर की शादी थाना श्रीनगर के पवा गांव निवासी मकुंदी के पुत्र राममिलन के साथ हुई थी। शादी के समय मांग के अनुसार भरपूर दान-दहेज दिया था लेकिन बाद में ससुराल पक्ष के लोग बाइक व एक भैंस की मांग करने लगे। पुत्री ने यह बात अपने पिता को बताई लेकिन उन्होंने और दहेज देने में असमर्थता जताई। जिसके बाद ससुराल पक्ष के लोग लाड़कुंवर को प्रताड़ित करने लगे। तब महिला अपने पिता के घर चली गई। बाद में ससुरालीजन उसे अपने साथ ले गए और एक पुत्री का जन्म भी हुआ। जो घटना के समय एक माह की थी। 14 नवंबर 2015 की शाम कुंवर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मृतका के पिता ने ससुराल पक्ष पर पुत्री को फांसी लगाकर मार डालने का आरोप लगाते हुए पति राममिलन, ससुर मकुंदी, सास पार्वती व खेमचंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) राकेश कुमार गौतम ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। मुकदमे की पैरवी कर रहे जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अभियुक्त मकुंदी, पार्वती व खेमचंद्र को मामले में दोषमुक्त किया गया है जबकि पति राममिलन पर दोष सिद्घ पाते हुए उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के समेत अन्य धाराओं में सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 36 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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