महोबा। हॉटकुक्ड योजना के नाम पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं विभाग की अनदेखी के चलते शिक्षण कार्य में भी गुणवत्ता नहीं आ पा रही है। तमाम आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटके होने से बच्चों को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा हैँ।
जिले में तीन से छह वर्ष तक 97165 बच्चे 881 आंगनबाड़ी केंद्रों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शासन ने इन बच्चों को गर्म भोजन मुहैया कराने के लिए हॉटकुक्ड योजना की शुरूआत की थी। योजना के अन्तर्गत बच्चों को गर्म भोजन केंद्र में ही दिया जाना है। लेकिन ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले कई माह से हॉटकुक्ड नहीं बनाया जा रहा है। जिसके चलते बच्चों योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गौरतलब है कि ग्रामीण अंचलों में आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए शासन द्वारा पुष्टाहार और गर्म भोजन दिए जाने की व्यवस्था की गई थी, जिससे बच्चों का केंद्रों के प्रति रुझान बढ़े। एक माह में 881 आंगनबाड़ी केंद्रों में हॉडकुक्ड के नाम पर 26.43 लाख रुपये खर्च किया जा रहा है। प्रति वर्ष 3 करोड़ 16 लाख 83 हजार रुपये व्यय करने के बाद भी बच्चों को नियमित गर्म भोजन आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं मिल पा रहा है।
घर में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र
प्रशासनिक उदासीनता के चलते आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपने घरों में केंद्र चला रहीं हैं, जिससे शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है। घर पर ही केंद्र होने के कारण कार्यकत्रियां बच्चों को पढ़ाने के बजाय घर के काम में मशगूल रहती हैं और बच्चों को सहायिका के भरोसे छोड़ देती है। इतना ही नहीं जिला कार्यक्रम विकास विभाग के अधिकारी भी आंगनबाड़ी केंद्रों का महीनों निरीक्षण नहीं करते हैं, जिससे इन केंद्रों के बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आ पा रही है।
शासन द्वारा चलाई जा रही हॉटकुक्ड योजना का पैसा चार माह से नहीं आया है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म भोजन नहीं बन रहा है। एक माह का पैसा आने के बाद चार माह तक नहीं आता है, जिससे योजना नियमित संचालित नहीं हो पा रही है। हॉटकुक्ड योजना के तहत पैसा भेजे जाने के लिए पत्र लिखा गया है।
रामेश्वर पाल
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महोबा