महोबा। होली की सुबह जो मां रसोई में जाकर तरह-तरह के पकवान बनाती थी और सभी को सावधानी से होली खेलने की सीख देती थी, वह मां इस बार घर के आंगन में नहीं होगी। घर में अगर पकवान बनेंगे भी तो उनमें वो स्वाद नहीं होगा और न ही होली के रंग परिवार पर चढ़ेगा, क्योंकि इन तीन परिवारों का पर्व उनकी मां के बगैर अब अधूरा ही रहेगा। बात हो रही है कि बृहस्पतिवार की भाेर कानपुर-सागर हाईवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाली तीन महिलाओं के परिवार की। जिनके घरवाले अब इस दुख को सहन करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। पर्व से ठीक पहले यह हादसा परिवार की खुशियां भी छीनकर ले गया।
शहर के सुभाष नगर निवासी भगवती, डाक बंगला के पास रहने वाली गीता और भटीपुरा निवासी श्यामारानी बुधवार की रात एक गेस्ट हाउस से पूड़ी बेलकर घर लौट रही थी। तभी कानपुर-सागर हाईवे पर मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर के पास पिकअप ने तीन महिलाओं समेत पांच को टक्कर मार दी थी और कुलचते हुए निकल गया था। इसमें भगवती, गीता व श्यामारानी की मौत हो गई थी जबकि तुलसिया और उसकी बहू राजकुमारी घायल हो गई थी। जिनका अभी इलाज चल रहा है। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने बृहस्पतिवार की शाम शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। हादसे के बाद परिवार के लोग इस गम को सहने में लगे है। लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि यह हादसा ऐसे समय पर हुआ जब होली का पर्व को महज चार दिन बचे हैं। ऐसे में परिवार पर्व की खुशियां भी नहीं मना पाएगा। जब-जब होली का पर्व आएगा, इन परिवारों को अपनी मां हमेशा याद आएगी।
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दो दिन से नहीं हो सकी थी बेटों से मां की मुलाकात
महोबा। सड़क हादसे में जान गंवाने वाली भगवती के बेटे रवि ने बताया कि उनकी मां आमतौर पर घर में रहती थी। हादसे से एक दिन पहले भी वह पूड़ी बनाने के लिए गई थी और इसके पहले एक बार और। रवि ने बताया कि वह खुद खाना बनाने का काम करता है और इस समय शादियों का सीजन है तो वह पिछले दो दिन से अपनी मां से नहीं मिल पाया था। मां, हादसे की शाम कब घर से निकली, उसे पता भी नहीं चला। रात में जब पुलिस घर आयी और हादसे की जानकारी दी तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई।
बताया कि उसके पिता स्व. फूलचंद्र का वर्ष 2017 में बीमारी के चलते निधन हो चुका है। उनका बड़ा भाई रविंद्र पहले डिलीवरी एजेंट का काम करता था और अब इस समय एक किराना की दुकान में काम करता है जबकि वह खाना बनाने का काम करता है। मां ने दोनों भाईयों की शादी भी कर दी थी। रवि ने कहा कि उसे नहीं पता था कि जिस काम के लिए वह अपनी मां से नहीं मिल पाया, अब इसी व्यस्तता के चलते वह कभी अपनी मां को देख नहीं पाएगा। हादसे में घायल राजकुमारी उर्फ कपूरी उसकी पारिवारिक मामी लगती है।
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पर्व के समय हादसे देते हैं और भी गहरा दुख
महोबा। भगवती के परिजनों ने बताया कि हादसा तो कभी भी हो सकता है लेकिन त्योहार के समय हादसा और भी गहरा सदमा देता है। त्योहार पर जहां परिवार तैयारी में लगा होता है, ऐसे में हादसा होने पर पूरे परिवार की खुशियां तहस-नहस हो जाती हैं।