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पदयात्रा में छूटे पसीने

Sat, 23 Jan 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला महोबा
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आठ किलोमीटर की पदयात्रा के दौरान पसीने से लथपथ रहे। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश देख उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान बनी रही। कभी पलट कर पीछे देखते तो कभी हाथ हिलाकर अभिवादन करते। कई बार धक्कामुक्की की नौबत आई और सुरक्षा घेरा टूट गया। फिर भी कारवां आगे बढ़ता रहा।
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पदयात्रा को लेकर पवा चौराहे पर सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथ में तख्तियां लिए लोग नारे लगा रहे थे। 12.30 बजे राहुल गांधी का काफिला पहुंचा। चौराहे पर रुकने के बजाय वह सीधे करीब 200 मीटर दूर मंडी स्थापना केंद्र पहुंचे। यहां करीब15 मिनट रुकने के बाद पूरा काफिला सूपा खेल मैदान में आयोजित चौपाल के लिए रवाना हुआ।
खेल मैदान को सुरक्षा कर्मियों ने पहले से घेर रखा था। अंदर पहुंचते ही प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री माइक संभालते हैं। इसके बाद पार्टी की ओर से तय किए गए ग्रामीण माइक पर बारी-बारी से बुलाए जाते हैं। सभी की बातें सुनने के बाद करीब 14 मिनट राहुल भाषण देते हैं। इसमें सूखे से तड़प रहे किसानों-मजदूरों को हक दिलाने की वकालय करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को कोसते हैं। यहां से उनकी पदयात्रा लाडपुर के लिए शुरू होती है। पदयात्रा के दौरान कांग्रेसियों के साथ आसपास के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ता है। कई बार सुरक्षा घेरा टूटता है। करीब दो किलोमीटर दूर सूपा क्रासिंग तक पहुंचते-पहुंचते राहुल गांधी पसीने से लथपथ हो जाते हैं।
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इस बीच बीच-बीच में वे इशारे से पानी मांगते हैं और उनके सहयोगी पानी भरा बोतल थमाते रहते हैं। रेलवे क्रासिंग से आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे कुछ लोग राहुल गांधी को अपना दर्द बताना चाहते हैं, लेकिन सिक्योरिटी में लगी फोर्स उन्हें न रुकने का इशारा करती है। वे आगे बढ़ते हैं और रेलवे स्टेशन तिराहे के पास पहले से इंतजार कर रही गुलाबी गैंग का अभिवादन करते हैं। गुलाबी गैंग की राष्टीय अध्यक्ष संपत पाल और जिलाध्यक्ष फरीदा बेगम राहुल गांधी का स्वागत करती हैं। यहां आसपास की अन्य महिलाएं भी बैठी हैं।
यहां भी एक-एक करके चार महिलाएं अपनी बात रखती हैं। फिर राहुल गांधी एक महिला के पास जाते हैं और पूछते हैं कि यहां कीी सबसे बड़ी समस्या क्या है। यह सुन महिला जवाब देती है पानी नहीं है साब। इसके बाद वह सूपा चौपाल सरीखा ही भाषण देते हैं और प्रदेश एवं केंद्र सरकार पर निशाना साधते हैं। यहां से उनका काफिला महोबा-झांसी मुख्य मार्ग पर पहुंचता है। वह करीब तीन किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद सड़क किनारे स्थित मातादीन कुशवाहा के घर रुकते हैं। यहां करीब 45 मिनट रुकने के बाद वह फिर लाडपुर नहर के पास पहुंचते हैं और 20 मिनट के संबोधन में पुरानी बातों के साथ ही हैदराबाद विश्वविद्यालय का मुद्दा उठाते हैं।

मातादीन के घर चाय पीने के बाद सुना दर्द
महोबा। पदयात्रा के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लाडपुर नहर से पहले मातादीन कुशवाहा के घर रुक जाते हैं। अचानक सिक्योरिटी में लगी फोर्स को इशारा होता है और उनके बगल में चल रहे जितिन प्रसाद उस घर की ओर इशारा करते हैं। यह देख पार्टी के नेताओं को हैरत होती है, लेकिन अगले ही पल पता चलता है कि यहां रुकने के बारे में किसी को बताया नहीं गया था।
पीछे से पक्का और आगे खपरैल कमरे में घुसते ही राहुल गांधी चारपाई पर लेट जाते हैं। फिर चाय पीते हैं और वहां मौजूद मातादीन कुशवाहा के परिवार वालों का हालचाल लेते हैं। कुछ ही देर में उन्हें दो रोती और आलू-टमाटर व मटर की सब्जी परोसी जाती है। वह खाते-खाते मातादीन के बच्चों से बतियाते रहते हैं। खाना खाने के बाद प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री को भी अंदर बुलाया जाता है। इसके बाद लाडपुर चौपाल के लिए रवाना होते हैं।
 राहुल गांधी का काफिला जाने के बाद मातादीन की पत्नी से बातचीत की गई तो उसने बताया कि राहुल भैया ने सिर्फ हालचाल लिया है। पूछा कि कितने बच्चे हैं और किस-किस क्लास में पढ़ते हैं। खेती के बारे में पूछा। जब हम लोगों ने बताया कि खेती सूख गई है तो उन्होंने पूछा की खर्चा कैसे चलेगा। राहुल गांधी के घर आने से कुछ मिला हो या न मिला, लेकिन मातादीन गदगद हैं। उनके घर रुकने का कार्यक्रम कब तय हुआ था, इस बावत वह कुछ भी बताने से इनकार करते हैं।
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