अदालत के आदेश के बाद शिक्षामित्राें का समायोजन रद्द हो जाने से प्राइमरी शिक्षा चरमरा गई है। आधा सैकड़ा से ज्यादा विद्यालय एकल हो गए हैं जबकि कुछ विद्यालय बंद होने की भी संभावना जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समायोजित शिक्षकों ने स्कूलों में जाना बंद कर दिया है।
जिले में करीब 800 शिक्षामित्रों का समायोजन करके सहायक अध्यापक बनाया गया था। डेढ़ दशक तक तीन हजार रुपये में नौकरी करने वाले शिक्षामित्रों को तीन साल पहले सपा सरकार ने सहायक अध्यापक बनाकर 30 हजार वेतन पर पहुंचा दिया था।
जिले के सभी विद्यालयों में समायोजित टीचरों के पहुंच जाने से एकल और बंद विद्यालय की समस्या खत्म हो गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समायोजित टीचरों का समायोजन रद्द होने से अब शिक्षामित्र से टीचर बनने वालों ने विद्यालयों में जाना ही बंद कर दिया है।
इससे शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आधा सैकड़ा से ज्यादा विद्यालय एकल हो गए हैं। शिक्षामित्रों से टीचर बने वालों को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद अब विद्यालयों में टीचरों की भारी कमी हो जाने से जिले में टीचराें का किया जा रहा समायोजन भी प्रभावित होने के आसार बढ़ गए है।
28 जुलाई को टीचरों के समायोजन के लिए काउंसलिंग कराई जा रही है। काउंसलिंग से पहले आए अदालत के आदेश के बाद 800 सहायक शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ऐसे में समायोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद कितने विद्यालय एकल हो रहे हैं। कोई विद्यालय बंद तो नहीं हो रहा है। इसकी सूची सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से मंगाई जा रही है। अभी तक इसका डेटा नहीं आ सका है। इसलिए कितने विद्यालय बंद हुए कितने एकल हुए यह बता पाना मुश्किल है। चारों ब्लाकों से डेटा आने के बाद ही बता पाएंगे। अमित कुमार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोबा