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Mahoba News: जिला अस्पताल समेत चार के पास फायर एनओसी, 20 बिना मानक संचालित

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फोटो 04 एमएएचपी 19 परिचय-जिला अस्पताल में लगा फायर सेंशर सिस्टम। संवाद
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महोबा। जनपद में करीब 20 ऐसे बड़े व कुछ छोटे अस्पताल संचालित हैं जहां अगर आग लगने की दुर्घटना हो तो वहां बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं है। अस्पताल संचालक बेखौफ होकर बेसमेंट तो कहीं संकरी गली के अंदर अपना कारोबार फैलाए हुए हैं। कुछ नामचीन अस्पताल तो शहर के मुख्य सड़कों पर चल रहे हैं। जिन पर अब तक अग्निशमन विभाग की नजर नहीं पड़ी है।
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अग्निशमन विभाग के अनुसार जिला अस्पताल महोबा के साथ ही तीन अन्य निजी अस्पताल हैं जिन्हें एनओसी दी गई है। इसके अलावा किसी भी अस्पताल संचालक ने एनओसी के लिए आवेदन नहीं दिया गया है। हमीरपुर चुंगी से पहले नवनिर्मित एक अस्पताल ने आवेदन कर रखा है। वहां मानकों की जांच की जा रही है। अब बात करें सरकारी आंकड़ों के बाहर की तो जिले में करीब 20 बड़े व छोटे अस्पताल बगैर मानकों के संचालित हो रहे हैं। इसमें महोबा मुख्यालय भी शामिल हैं। यहां पर छतरपुर सड़क, महिला जिला अस्पताल के पास, रामकथा मार्ग समेत अन्य इलाकों में खुलेआम अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। ये अस्पताल संकरे रास्तों में संचालित हैं जबकि कुछ का संचालन बेसमेंट में हो रहा है। यहां दमकल की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। इनमें निकास द्वार एक ही है। मानक पूरा करने के नाम पर यहां एक फायर एक्सटिंग्विशर ही लगाया गया है।

शॉर्ट-सर्किट व बिजली उपकरण से अधिक होते हादसे
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महेंद्र सिंह के अनुसार इमारतों में अधिकांश हादसे शॉर्ट-सर्किट या बिजली संचालित उपकरणों से होती हैं। ऐसे में होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, अस्पताल संचालक समय-समय पर प्रतिष्ठान के बिजली लोड की जांच कराते रहे। एसी की सर्विसिंग समय पर कराएं और केबल की जांच कराते रहे। प्रतिष्ठान में एक से अधिक रास्ते आने-जाने के लिए बनाएं और लोगों को इन रास्तों को बताने के लिए संकेत भी लगाएं। जहां बिजली का स्विच लगा हो, वहां आसपास कोई भी वस्तु न रखें इससे आग फैलने का खतरा हो।
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फायर सेफ्टी सिस्टम जरूर इंस्टाल कराएं

प्रभारी अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, अस्पताल संचालन से पहले अग्निशमन विभाग से एनओसी जरूर प्राप्त करें। इसके लिए संचालकों को अपने प्रतिष्ठान में अलग-अलग तरीके के फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने पड़ते हैं। इनमें होज पाइप लाइन, फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर स्प्रिंकलर सिस्टम, सेंसर सिस्टम आदि शामिल हैं। स्मोक डिटेक्टर, फायर स्प्रिंकलर सिस्टम जिला अस्पताल में देखा जा सकता है। यह सबसे आधुनिक तरीका है। इससे आग पर यह सिस्टम खुद ही काम करता है। प्रतिष्ठान ऐसी जगह पर स्थापित करें जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आ सकें।


होटलों में चेक किए सुरक्षा उपकरण

दिल्ली व बिहार में आग से हुई घटनाओं को लेकर बृहस्पतिवार से अग्निशमन विभाग टीम ने होटल और अन्य प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा उपकरणों की जांच की गई। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महेंद्र सिंह टीम के साथ विभिन्न होटलों में पहुंचे और मॉक डि्रल कराते हुए यहां लगे होज पाइप से पानी की बौछार कराकर जांच की। साथ ही आग लगने पर अन्य उपकरणों के जरिए आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया गया।
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