नए जोश के साथ अपेक्षाएं, उम्मीदें और चुनाव। विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने को लेकर छात्राएं उत्साहित है। इसके पीछे उनके अपने सपने भी है। उनके मन में क्या चल रहा है और वह राजनीति में कैसा बदलाव चाहते है।
नया जोश, नई उमंग और नए तेवर के साथ पहली बार मतदान को लेकर युवा बेहद उत्साहित है। वह अपने वोट की ताकत से बदलाव चाहते है। उन्हें मलाल है कि चुनाव तो होते रहते है, लेकिन बुनियादी समस्याएं अपनी जगह बनी रह जाती है। पहली बार जिन छात्राओं को मतदान का अवसर मिला है, उनकी राय जानने के लिए अमर उजाला की टीम मंगलवार को शहर के मां चंद्रिका महिला महाविद्यालय पहुंची।
यहां छात्राओं ने शिक्षा, रोजगार, मूलभूत सुविधाएं और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बात की। छात्राओं की जुबां पर एक ही बात थी कि जातिवाद क्षेत्रवाद मिटे और युवाओं को रोजगार के लिए भटकना न पड़े। योजनाएं बने तो हर वर्ग के लोगों को उसका लाभ हो।
इसके लिए नियमित मनीटरिंग कराई जाए। इस दौरान कालेज परिसर में छात्राओं ने मतदान की शपथ ली। इस मौके पर प्राचार्य डा. राजेश शुक्ला, डा. मुहम्मद आरिफ राइन आदि मौजूद रहे।
हमारा मुद्दा हमारा वोट
जब तक समाज से भेदभाव दूर नही होगा। सर्वागीण विकास की बात बेमानी है। वह जाति, धर्म से ऊपर उठकर मतदान करेगी। ताकि बेहतर जनप्रतिनिध चुनकर आ सके। -रूबी चौरसिया
समान शिक्षा के साथ समान रोजगार की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को ध्यान देना होगा। काबिलियत के आधार पर नौकरी में सलेक्शन होना चाहिए। -सुधा राजपूत
शिक्षा और रोजगार में आरक्षण की व्यवस्था खत्म होना चाहिए। इससे मेधावी छात्र छात्राओं को नुकसान होता है। आरक्षण खत्म होने से सभी को समान मौका मिलना चाहिए।- सेहनाज खातून
सरकार योजनाएं तो तमाम बनाती है लेकिन उनका धरातल पर असर नही दिखता। पहुंच वाले लोग ही लाभ उठाते है। पहल ऐसी हो कि सभी वर्ग के लोगों को लाभ मिले। -अजीता द्धिवेदी
शिक्षा के क्षेत्र में नए कालेज खुलना चाहिए। ताकि छात्राएं उच्च शिक्षा हासिल कर सके। सरकार शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। ताकि छात्राएं भी उच्च पदो पर आसीन हो। -आसिया खातून
महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बने। ताकि महिलाएं स्वतंत्रता के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके। इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाने की जरूरत है। - तारा अनुरागी
सबसे पहले जातिवाद और क्षेत्रवाद को खत्म करना होगा। इससे तमाम चीजे अपने आप सुधर जाएंगी। अब समय बदल गया है लोगों को भी अब अपनी सोच बदलनी होगी।-रोशनी पाठक
चुनाव के समय ही नेताओं को जनता की याद आती है। जीत के बाद नेता कभी दोबारा लौटकर नही आते। ऐसे नेताओं को नकारते हुए क्षेत्र का विकास करने वाले जनप्रतिनिधि को चुना जाए। -खुशबू समाधिया
जिले में प्रतिभाओं की कमी नही है। बस जरूरत है उन्हें निखारने के लिए। सरकार को चाहिए कि वह प्रतिभाओं को निखारने के लिए समान मौका और उचित पारिश्रमिक की व्यवस्था करे। -संगीता सविता
पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण विकास तो दूर मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। इस बार ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव किया जाएगा जो क्षेत्र के विकास के साथ जनता से किए वायदों पर खरा उतरे। -दिव्या सिंह