अनशनस्थल पर महर्षि बाल्मीकि के चित्र पर माल्यापर्ण करते अनशनकारी
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महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 473 दिन से अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर व उनके साथियों ने रविवार को महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर उनको याद किया। अनशनकारियों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर दो मिनट का मौन भी रखा।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि आदि कवि महर्षि वाल्मीकि का जन्म अश्विन मास की पूर्णिमा को आज ही के दिन हुआ था। जिसे हम शरद पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। उनके बचपन का नाम रत्नाकर था और वे महर्षि कश्यप की नौवीं संतान वरुण व चर्षणी के घर पैदा हुए थे। महर्षि कश्यप कश्मीर क्षेत्र में रहते थे और उन्हीं के नाम पर उस क्षेत्र का नाम कश्मीर पड़ा। उनके पौत्र रत्नाकर को बचपन में आदिवासी चुरा कर ले गए और उनको पाला पोसा। चूंकि उनका पेशा लूटपाट करना था इसलिए रत्नाकर भी लूटपाट करने लगे लेकिन प्रकृति को कुछ और मंजूर था। जब उन्होंने नारद मुनि को लूटा तो उन्होंने कहा कि तुम किसके लिए लूटपाट करते हो, अपने परिवार के लिए। क्या वे तुम्हारे पापों में हिस्सेदारी करेंगे, थोड़ा पूछ लो। जब परिवार ने पापों में भागीदारी से मना कर दिया तो वे साधु हो गए और रामायण जैसा अनूठा ग्रंथ रच डाला। अनशन स्थल पर उनको नमन करने वालों में वीरेंद्र अवस्थी, सुरेश सोनी, उदित नारायण यादव, राम आसरे राही, हरगोविंद, रंजीत आदि मौजूद रहे।