महोबा। जिला अस्पताल में पेटदर्द व उल्टी से पीड़ित मरीज की माैत पर बृहस्पतिवार की देर रात परिजनों ने हंगामा किया। डाॅक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। भर्ती अन्य मरीजों के तीमारदारों ने भी डाॅक्टरों पर बाहर के मेडिकल स्टोरों से दवाएं मंगाने और इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
कोतवाली चरखारी के रिवई गांव निवासी वृद्ध तुलसीदास (60) को पेटदर्द और उल्टी की शिकायत पर परिजन जिला अस्पताल लाए। तुलसीदास की बहू मानसी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टर ने बाहर से 800 रुपये की दवाई व इंजेक्शन मंगाए। ये दवाएं लेकर उसने डाॅक्टर को दीं लेकिन डॉक्टर मरीज को देखने के लिए नहीं आए। वह रात में कई बार इमरजेंसी कक्ष में जाकर डाॅक्टर के पास गई और अपने मरीज का इलाज करने के लिए मिन्नतें कीं। इसके बाद भी कोई डाॅक्टर मौके पर नहीं आया। इलाज के अभाव में देर रात तुलसीदास की मौत हो गई।
इसी बात से नाराज परिजनों ने इलाज में लापरवाही करने वाले डाॅक्टरों और स्टाफ पर कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर अस्पताल में मौजूद सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराया। सीएमएस डॉ. पीके अग्रवाल का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, कार्रवाई की जाएगी।
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महोबा । मृतक की पुत्रवधू मानसी का आरोप है कि उसने जब डाॅक्टर ने बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर आने के लिए कहा था, तब उसके पास रुपए भी नहीं थे। किसी से रुपए उधार लेकर वह 800 रुपए की दवाएं लाई थी, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। जब इलाज के अभाव में तुलसीदास की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उसने डाॅक्टरों और स्टाफ से मरीज को रेफर करने की मांग की लेकिन उन्होंने रेफर भी नहीं किया। कुछ देर बाद मरीज की मृत्यु हो गई। यदि सही इलाज कर दिया होता या फिर रेफर कर दिया होता तो शायद उसके ससुर तुलसीदास की जान बच जाती।
मेडिकल स्टोर से मंगा रहे दवाएं
महोबा। जिला अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज लक्ष्मण निवासी नारुपुरा ने भी डाॅक्टरों और स्टाफ द्वारा लापरवाही बरतने की शिकायत की। बताया कि बृहस्पतिवार को दोपहर 2.30 बजे भर्ती होने के बाद भी देर रात तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। जरूरी इंजेक्शन बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 450 रुपये खर्च करके मंगवाने पड़े।