महोबा। जिले में ई नीलामी से पहाड़ों के पट्टे स्वीकृत होने से गिट्टी और पत्थर की कीमतें छह गुना बढ़ जाएगी। इससे पत्थर कारोबार के प्रभावित होने के आसार बढ़ गए है। महंगाई के चलते पत्थर मंडी कबरई में ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है। पत्थर कारोबार को अब नए सिरे से शुरू करने के लिए पत्थर कारोबारी परेशान है।
सपा शासन में प्रति एकड़ सरकारी न्यूनतम देय राशि 1.20 लाख रुपये थी। जिसे बढ़ाकर ई नीलामी में प्रति एकड़ न्यूनतम देय राशि 7 लाख रुपये वार्षिक कर दी गई। वहीं 15 हजार रुपये प्रति एकड़ के स्टांप शुल्क के स्थान पर 7.50 लाख रुपये कर दी गई है। जिले में 32 खनन क्षेत्रों में आनलाइन नीलामी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जो 27 मार्च को पूरी होगी। खनिज कारोबारियों द्वारा 26 साल बाद पहाड़ों के पट्टे ई नीलामी से मिलने के कारण कई गुना कीमतें बढ़ गई। जिससे कच्चा माल महंगा होने से खंडा, बोल्डर और गिट्टी की कीमतें कई गुना बढ़ जाएगी। मौजूदा समय में एक ट्रक गिट्टी में 3500 रुपये रायल्टी देनी पड़ती थी। ई नीलामी के बाद एक ट्रक पर 12 हजार से 15 हजार रुपये तक रायल्टी दर देनी पड़ेगी।
खनिज विभाग द्वारा कराई जा रही आनलाइन नीलामी में जिले के प्रमुख खनन क्षेत्र बघवा में सर्वाधिक बोली 928 रुपये प्रति घनमीटर से हुई। जिसमें सरकारी बोली 54 लाख से 4.50 करोड़ में टूटी। वहीं गौहारी गाटा संख्या 512 में आधा दर्जन खनन पट्टों की ई नीलामी बोली 850 रुपये प्रति घनमीटर से 1100 रुपये प्रति घनमीटर तक पहुंच गई। जिससे इन क्षेत्रों में एक करोड़ से दो करोड़ के बीच वार्षिक धनराशि राज्य सरकार को देनी होगी। वहीं इन क्षेेत्रों के खनन पट्टे निस्पादन में स्टांप ड्यूटी 1 करोड़ से 6.50 करोड़ रुपये तक देनी होगी।