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सूखा के कारण बिगड़ रहे हालात, पलायन

Thu, 11 Feb 2016 11:36 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
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बुंदेलखंड में सूखे के चलते भुखमरी जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। किसानों का राशन पानी खत्म होने लगा है। अब किसान रोजी रोटी की जुगाड़ में परिवार समेत महानगरों की ओर पलायन करने को विवश हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा विकट स्थिति पशुओं की है, जिनके लिए पर्याप्त चारा तक उपलब्ध नहीं है।
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वहीं पशुपालकों ने भी इन पशुओं को उनके हाल पर छोड़ दिया है। साथ ही चारे के अभाव में अन्ना पशुओं के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से सूखे के हालात में पशुओं के लिए भूसा केंद्र खोलकर चारे की व्यवस्था की है, लेकिन भूसा केेंद्रों से पशुओं को मिलने वाला भूसा ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।

 
वर्तमान में जिले में 2.80 लाख पशु हैं। सूखे के चलते खेतों में भूसा चारा न होने से जिला प्रशासन की ओर से पंचायत स्तर पर 39 भूसा केंद्र बनाए थे, लेकिन अभी तक 19 केंद्रों से महज 1700 क्विंटल भूसे का वितरण ही किया गया।
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पशुओं की संख्या के हिसाब से देखा जाए तो एक पशु के  हिस्से में एक किलो भूसा आएगा। इससे शासन की भूसा केंद्र योजना बेमतलब साबित हो रही है।

 
हालांकि पशुओं की प्यास बुझाने के लिए गांवों और शहरों में बनाई गई चरही पशुओं की प्यास बुझाने का काम जरूर कर रही है। ग्रामीणों के पलायन करने से अन्ना पशुओं समस्या को देखते हुए आधा दर्जन गौशालाएं भी बनाई गई हैं, लेकिन वहां भी भूसे का काई इंतजाम नही है।

 

चांदो गांव में लटक रहे ताले- सूखे से बर्बाद किसान गांव से पलायन कर गए हैं। हालत यह है कि जिले से 45 फीसदी ग्रामीणों ने महानगरों की ओर रुख कर लिया है।



ग्राम चांदो निवासी रामू अहिरवार, चिरंजीव, लक्ष्मी अहिरवार, बहादुर, प्रेम अहिरवार, दशरथ, रिवई निवासी रामचरन, विश्वनाथ, मुन्नालाल, दीनदयाल अहिरवार, खन्ना निवासी हरदयाल आदि ग्रामीणों के घरों के बाहर ताले लटकते नजर आ रहे हैं।

 
वर्जन- पशुओं की भूख मिटाने के लिए जिले में 39 न्याय पंचायतों में भूसा केंद्र खोले गए है, जहां पर अभी तक 19 भूसा केंद्रों पर प्रति बड़े जानवर को पांच किलो और छोटे जानवर को ढाई किलो के हिसाब से भूसा वितरण किया जा रहा है।
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शीघ्र ही सभी केंद्रों पर भूसे का वितरण शुरू कराया जाएगा। पशुओं के पानी का चरही बनाकर इंतजाम कर दिया गया है। सादिक अली, सीबीओ महोबा।
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