सूखा के दौर में खजूर की झाड़ियां मवेशियों के भूख मिटाने का साधन बन गई। संकट के दौर में पशुपालक बीहड़ जंगलों में दिनभर झाड़ियों को ढूंढकर बैलगाड़ी से घर तक लाने में किसान पूरा दिन खपा देते हैं और घर में मवेशियों की भूख मिटा रहे हैं।
बुंदेलखंड में दैवी आपदा से बर्बाद किसान और पशुपालक इस वर्ष सूखा को लेकर परेशान है। इस वर्ष बारिश न होने से खरीफ के बाद रबी फसल तबाही से भूसा का संकट है।
शासन व प्रशासन भले ही चारा भूसा का बंदोबस्त का दम भर रहे हों, लेकिन किसानों के लिए मवेशियों का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। आसपास चारा न मिलने से पशु धन बचाने के लिए खजूर की झाड़ियों का सहारा लिया है। सैकड़ों किसान बैलगाड़ी से बीहड़ जंगलों को सुबह कूच कर जाते हैं।
जंगलों में मवेशियों के खाने योग्य प्राकृतिक वनस्पति न मिलने से वह अब खजूर की झाड़ियों को काटकर ला रहे है। सुबह से शाम तक झाड़ियां काटने में दिन व्यतीत करने के बाद घर पहुंचकर कृषक खजूर की झाड़ियों को गड़ासा और कटिया मशीन से काटकर मवेशियों का पेट भर रहे है।
फरवरी में मवेशियों के लिए चारा संकट को देखकर सैकड़ों पशुपालक मवेशी पालन से तौबा कर रहे हैं। परथनिया निवासी कृषक जगदीश कुशवाहा, रमेश कुशवाहा, चेतराम अहिरवार, तेजराम ने बताया कि चारा की गांव और आसपास व्यवस्था नहीं है। मेहनत मजदूरी का समय पशुओं के चारा व्यवस्था में गुजर जाता है। ऐसे में पशुओं का पालन मुश्किल हो रहा है।