कबरई (महोबा)। गिट्टी लेकर जाने वाले भारी वाहनों के लिए लागू रूट डायवर्जन की वजह से पत्थरमंडी का कारोबार 60 फीसदी तक घट गया है। वाहनों के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जाने की बाध्यता की वजह से 18 दिन में ही मंडी बंदी के कगार पर पहुंच गई है।
क्रशर कारोबारी रोशन तिवारी, जीतेंद्र पाल, आदित्य मिश्रा, बलवीर सिंह, पप्पू यादव, मुन्नीलाल विश्वकर्मा, अमित तिवारी, नरेश यादव आदि ने बताया कि पहले रोज एक क्रशर प्लांट में 20 ट्रक गिट्टी लेने आते थे। अब छह-सात से ज्यादा नहीं आ रहे हैं। इस वजह से गिट्टी की बिक्री आधे से भी कम हो गई है। यही हाल रहा तो पत्थर व्यापार ठप हो जाएगा।
हालांकि, जिला प्रशासन ने घाटमपुर तक ग्रिट परिवहन करने के लिए हाईवे से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन वहां तक महज दस फीसदी ही गिट्टी की बिक्री होती है। कानपुर, लखनऊ, सीतापुर, कन्नौज, गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, बहराइच, अयोध्या, बाराबंकी, प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़ व वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में गिट्टी पहुंचाने के लिए ट्रकों को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जाना पड़ रहा है। दूरी और परिवहन लागत बढ़ने से कई ट्रक मालिकों ने अपने वाहन खड़े कर दिए हैं, जबकि कुछ अन्य ट्रांसपोर्टर दूसरी मंडियों का रुख कर रहे हैं।
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आधे से कम रह गया व्यापार
खनन एवं क्रशर उद्योग समिति के अध्यक्ष बाल किशोर द्विवेदी बताते हैं कि वाहनों के रूट डायवर्जन से 18 दिन में ही पत्थर व्यापार आधे से ज्यादा कम हो गया है। समिति का प्रतिनिधिमंडल गृह सचिव संजय प्रसाद से मिला था। उन्होंने जिलाधिकारी महोबा से बात कर घाटमपुर तक हाईवे से ग्रिट परिवहन करने की अनुमति देने की बात कही थी, लेकिन इससे खास राहत नहीं मिली। घाटमपुर तक महज दस प्रतिशत गिट्टी की बिक्री होती है, जबकि 90 फीसदी गिट्टी की सप्लाई दूसरे जिलों में होती है।
अधिक दूरी के साथ 10हजार आ रहा अतिरिक्त खर्च
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष छुट्टन सिंह का कहना है कि हाईवे की जगह एक्सप्रेसवे से गिट्टी परिवहन करने में करीब 10 हजार रुपये प्रति चक्कर अतिरिक्त खर्च आ रहा है। डेढ़ गुना समय भी लगता है। इससे कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक खड़े कर दिए हैं और कई ट्रांसपोर्टर दूसरी मंडियों में जा रहे हैं। कुछ लोगों ने ट्रकों को बालू परिवहन में लगा दिया है। इससे गिट्टी ले जाने वाले वाहनों की संख्या तेजी से घटी है।