मोहलत खत्म, गड्ढे बरकरार
महोबा/कबरई। शासन की प्राथमिकता वाले गड्ढामुक्त अभियान का जिले में कोई असर नहीं दिख रहा है। इक्का-दुक्का सड़कों को छोड़कर जिले की दर्जनों सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। रिवई-कबरई और चिचारा-मटौंध मार्ग में दो-दो फीट गहरे गड्ढे होने से वाहन हिचकोले खाते निकल रहे हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। शासन ने 30 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने के आदेश दिए थे। यह मोहलत अब खत्म हो गई है, मगर सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हुईं। मंगलवार को जिले की सड़कों की पड़ताल की गई तो अधिकतर सड़कें उखड़ी व जर्जर हालत में मिलीं।
पांच वर्ष से जर्जर है चिचारा-मटौंध मार्ग
कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग से झांसी-मिर्जापुर हाईवे को जोड़ने वाला 15 किमी लंबा चिचारा-मटौंध मार्ग पांच वर्ष से उखड़ा है। सड़क पर दो-दो फीट गहरे गड्ढे हैं। कई स्थानों पर तो पूरी सड़क ही गायब है। इस मार्ग से चिचारा, कहरा, कुलकुआं, खिरुही, तिंदुही, अटघार, सिरसी समेत एक दर्जन गांव के लोगों का आवागमन होता है। गड्ढामुक्त अभियान के तहत भी इसकी हालत नहीं बदली। ग्रामीणों में आक्रोश है।
ओवरलोड वाहनों ने उखाड़ी सड़क
ओवरलोड वाहनों की वजह से रिवई से कबरई संपर्क मार्ग की हालत बहुत खराब है। दो वर्ष पहले इस सड़क का कायाकल्प कराया गया था, लेकिन इस समय दो-दो फीट गहरे गड्ढों में आए दिन हादसे हो रहे हैं। 16 किमी लंबे इस मार्ग में काकुन, रिहुनिया, बैहारी, बम्हौरी, कमलखेड़, सलुआ, उटियां, धरौन, शिवहार आदि गांवों के लोगों का आवागमन है।
चिचारा से मटौंध तक बनी सड़क कई वर्षों से उखड़ी पड़ी है। ग्रामीणों ने कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
विचित्र सिंह, कहरा गांव
अधिकारी सड़क ठीक करने के नाम पर महज खानापूरी कर रहे हैं। यही वजह है कि कागजों में गड्ढामुक्त अभियान चलाया गया, लेकिन सड़कें उखड़ी पड़ी है।
साकेत त्रिपाठी, रिवई गांव
अभियान के तहत जिले की कई सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया है। शेष सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। शासन ने अभियान की तिथि दस दिसंबर तक बढ़ा दी है।
विपिन कुमार, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
रिवई-कबरई मार्ग में कई स्थानों से गायब सड़क।- फोटो : MAHOBA