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दो भाइयों को आजीवन कारावास

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महोबा। अपर जिला सत्र न्यायाधीश द्वितीय संतोष मौर्य की अदालत में चल रहे छह वर्ष पुराने जानलेवा हमले व एससीएसटी एक्ट के मामले में मंगलवार को फैसला सुनाया। साक्ष्यों व गवाहों को सुनने के बाद आरोप सिद्ध होने पर दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर दो-दो माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
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थाना श्रीनगर के सिलारपुरा गांव निवासी पंचू अहिरवार की नातिन विनीता 19 सितंबर 2014 को शौच क्रिया के लिए खेतों की ओर जा रही थी। तभी गांव के ही विनोद व घंसूपाल ने गालीगलौज की ओर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। नातिन ने घर आकर पूरी घटना बताई। तब पंचू अपने पुत्र वीरेंद्र व नाती राहुल के साथ उलहना देने के लिए घंसूपाल के घर पहुंचा। घंसूपाल और पिता धनीराम व भाई रामप्रसाद ने कुल्हाड़ी व गड़ासे से वीरेंद्र व राहुल पर हमला कर लहूलुहान कर फरार हो गए थे।
पंचू घायलों को लेकर अस्पताल पहुंचा। जहां वीरेंद्र की हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर कर दिया था। घटना के पांच दिन बाद 25 सितंबर को पंचू ने घंसूपाल, धनीराम, रामप्रसाद व विनोद के खिलाफ जानलेवा हमला व एससीएसटी एक्ट का मामला दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने घंसू पाल की चार्जशीट न्यायालय भेजी। इस मुकदमे में न्यायालय ने घंसू पाल के अलावा तीन अन्य आरोपियों को भी तलब किया। मुकदमे के दौरान धनीराम की मृत्यु हो गई जबकि विनोद के नाबालिग होने पर किशोर न्यायालय भेजा गया। मंगलवार को न्यायाधीश संतोष मौर्या ने घंसूपाल व भाई रामप्रसाद को घटना का दोषी पाया। अदालत ने दोनों भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सरकार पक्ष से मुकदमे की पैरवी विशेष लोक अभियोजक एससीएसटी एक्ट प्रमोद पालीवाल ने की।
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