-जिला अस्पताल में स्थापित आरटीपीसीआर लैब में लगी मशीनें। संवाद
- फोटो : -जिला अस्पताल में स्थापित आरटीपीसीआर लैब में लगी मशीनें। संवाद
महोबा। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने आरटीपीसीआर लैब को शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए नॉन मेडिकल साइंटिस्ट व डाटा एंट्री ऑपरेटर तैनात कर दिए गए हैं जबकि अन्य स्टाफ को तैनात करने की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों को इंजीनियर चेक कर चुके हैं, जो चालू हालत में है।
जिला अस्पताल के प्रथम तल में यह लैब आईसीयू वार्ड के समीप स्थापित है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यह लैब स्थापित की गई थी। इसमें करीब 500 से अधिक सैंपलों की जांच की सुविधा थी लेकिन कोरोना के समय प्रतिदिन करीब 300 से 500 मरीजों की रोजाना जांच होती थी। सीएचसी और जिला अस्पताल में एंटीजन जांच में पॉजिटिव कोरोना के मरीजों की आरटीपीसीआर जांच कराई जाती थी। इस लैब के खुलने से कोरोना के मरीजों को सहूलियत मिली थी। क्योंकि इससे पहले सैंपल बांदा, झांसी आदि जगह भेजे जाते थे, जिनकी रिपोर्ट कई दिन में मिलती थी।
वर्ष 2021 में कोरोना खत्म हुआ तो आरटीपीसीआर लैब बंद हो गई। हालांकि, आरटीपीसीआर लैब में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को दूसरी नौकरियों में प्राथमिकता दी गई थी लेकिन एक बार फिर कोरोना के नए वैरियंट ने दस्तक दे दी है। देशभर में एक हजार से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। शासन ने भी स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इन दिनों गर्मी के मौसम में खांसी, जुखाम, बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही आरटीपीसीआर लैब को फिर से शुरू किया जाएगा। इसके लिए लैब में नॉन मेडिकल साइंटिस्ट प्रियंका और डाटा एंट्री ऑपरेटर आशीष की तैनाती पहले से ही है। अन्य स्टाफ भी तैनात किया जा रहा है। कोरोना से निपटने के लिए पहले से इंतजाम किए जा रहे हैं। ताकि, जरूरत पड़ने पर कोरोना के मरीजों की आरटीपीसीआर जांच भी की जा सके और उनका इलाज बेहतर ढंग से किया जा सके। -डॉ. पीके अग्रवाल, जिला अस्पताल, महोबा।