फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahoba News: रोडवेज के नाम भूमि स्थानांतरित न होने से लटका चरखारी बस स्टैंड का निर्माण

Tue, 30 Sep 2025 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
विज्ञापन
विज्ञापन
महोबा। रियासतकालीन कस्बा चरखारी में आज तक बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका। बस स्टैंड के निर्माण के लिए पिछले दो साल से चल रही कवायद ठंडे बस्ते में पड़ी है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से बस स्टैंड के निर्माण के लिए जमीन की व्यवस्था कराए जाने की मांग की जा रही है लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी आज तक जमीन को रोडवेज के नाम हस्तांतरित नहीं कर सके। ऐसे में खुले आसमान के नीचे खड़े होकर यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। जिससे यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
विज्ञापन

कस्बा चरखारी की आबादी 50 हजार से अधिक है। साथ ही आसपास के 25 से ज्यादा गांवों के लोग यात्रा करने के लिए चरखारी आते हैं। चरखारी में तालाब के किनारे खुले आसमान के नीचे बस खड़ी होती हैं। यहां से कानपुर, हमीरपुर, मौदहा, दिल्ली, छतरपुर समेत कई स्थानों के लिए बसों की आवाजाही होती है। महोबा डिपो की करीब 13 बसें प्रतिदिन चरखारी मार्ग पर आवाजाही करती हैं। इसके अलावा अन्य डिपो की बसें भी आती हैं। निजी बसों का भी चरखारी से संचालन किया जा रहा है। ऐसे में परिवहन निगम की ओर से स्थाई बस स्टैंड के निर्माण की मांग की गई थी। तब तत्कालीन एसडीएम की ओर से कहा गया कि बस स्टैंड के लिए कस्बा चरखारी में सूपा रोड पर तालाब के पास एक एकड़ जमीन रोडवेज बस स्टैंड निर्माण के लिए चिह्नित की गई। इसके बाद रोडवेज के एआरएम की ओर से पत्राचार कर इस जमीन को परिवहन निगम के नाम हस्तांतरित कराए जाने की मांग की गई लेकिन आज तक जमीन रोडवेज के नाम नहीं चढ़ सकी। इससे बस स्टैंड के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
-
पर्यटक स्थलों की भरमार, फिर भी बस स्टैंड की दरकार
महोबा। झीलों का शहर कहे जाने वाले रियासतकालीन कस्बा चरखारी बुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध है। यह चरखारी रियासत की राजधानी थी। विजय सागर, मलखान सागर, वंशी सागर, जय सागर, रतन सागर और कोठी ताल आदि झीलें स्थित हैं, इसलिए चरखारी को सप्त सरोवरों का शहर कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के 108 मंदिर स्थित है। जिसमें सुदामापुरी का गोपाल बिहारी मंदिर, रायनपुर का गुमान बिहारी, मंगलगढ़ के मंदिर, बांके बिहारी के मंदिर हैं। कार्तिक मास में चरखारी में भव्य मेला लगता है। यह मेला रियासतकाल के समय से चला आ रहा है। कस्बा चरखारी में पर्यटक स्थलों की भरमार है। इसके बाद भी आज तक यहां बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका।
विज्ञापन

-
बस स्टैंड न होने से होती है परेशानी
चरखारी निवासी समाजसेवी नीरज द्विवेदी का कहना है कि रियासतकाल के समय चरखारी का अपना वैभवशाली इतिहास रहा है लेकिन आज तक यहां बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका। ऐसे में बारिश व गर्मी के मौसम में यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बस स्टैंड का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए।
-

चरखारी के अखिलेंद्र खरे का कहना है कि चरखारी में बस स्टैंड बनना जरूरी है। कस्बा समेत आसपास के 25 गांवों के ग्रामीण यहां से बस पकड़ने के लिए आते हैं। बसों के इंतजार में उन्हें खुले आसमान के नीचे खड़ा होना पड़ता है। जिससे उन्हें परेशानी होती है।
-
हनीफ अहमद का कहना है कि देसी-विदेशी पर्यटक चरखारी घूमने के लिए आते हैं। चरखारी का अपना ऐतिहासिक महत्व है। स्थाई बस स्टैंड का निर्माण न होने से लोग परेशान हैं। गर्मियों व बारिश में लोग सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं।
-

कस्बा चरखारी में बस स्टैंड के निर्माण के लिए जमीन रोडवेज के नाम हस्तांतरित कराए जाने की मांग को लेकर चार बार पत्राचार किया गया लेकिन आज तक जमीन रोडवेज के नाम नहीं चढ़ी। जमीन हस्तांतरित होने के बाद ही बस स्टैंड के निर्माण का काम शुरू कराया जा सकेगा। -धर्णेंद्र कुमार चौबे, एआरएम, महोबा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें