महोबा/कुलपहाड़। रबी सीजन में जिले के किसानों को खाद की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। पहले डीएपी और अब यूरिया खाद के लिए किसान भटक रहे हैं। अधिकांश समितियों में खाद नहीं है तो कुछ में 10 दिन से ताले लगे हैं। ऐसे में किसानोंं को यूरिया नहीं मिल पा रही है। किसानोंं का कहना है कि समय से खाद न मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित होगी।
किसान संघ कुलपहाड़ और सहकारी समिति बीपैक्स में दस दिन से यूरिया नहीं है। किसान प्रतिदिन समितियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन ताला लगा मिलने से वह घंटों इंतजार के बाद लौट रहे हैं। किसानों ने किसी तरह गेहूं, मटर, चना और सरसों की बोआई तो कर ली लेकिन एक माह का समय बीतने के बाद जब यूरिया की जरूरत पड़ी तो समितियों में खाद की किल्लत शुरू हो गई है। कुलपहाड़ में साधन सहकारी समिति व किसान संघ के गोदाम है लेकिन दोनों में 10 दिन से ताला लगा है। समिति के सचिव मनीष मिश्रा का कहना है कि खाद पूर्व में कई बार वितरित की जा चुकी है। जैसे ही खाद आएगी तो उसका वितरण किया जाएगा।
-
यूरिया नहीं मिली तो प्रभावित होगी फसल
किसान रामेश्वर अहिरवार ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल की बोआई की है। फसल में पानी लगाया जा चुका है। ऐसे में यदि यूरिया नहीं डाला गया तो फसल की पैदावार अच्छी नहीं होगी और उत्पादन घटेगा। इससे भारी नुकसान होगा। विभागीय अधिकारियों को जल्द से जल्द यूरिया का वितरण कराना चाहिए।
-
बड़े काश्तकार किसान अरविंद सिंह का कहना है कि उनकी खेती में सिंचाई हो चुकी है। अब यूरिया नहीं मिल रही है। जब प्रशासन को जानकारी है कि फसल बोआई के एक महीने बाद यूरिया की खपत बढ़ जाती है तो इसकी व्यवस्था पहले से करनी चाहिए। यदि यूरिया नहीं मिली तो गेहूं व मटर की पूरी फसल बेकार हो जाएगी
अधिकारियों का दावा, जिले में भरपूर खाद
महोबा। समितियों में खाद न होने से एक ओर जहां किसान परेशान हैं, वहीं विभागीय अधिकारी जिले में भरपूर खाद का दावा कर रहे हैं। सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त सहकारिता अजेंद्र कुमार ने बताया कि बफर गोदाम में 4,432 एमटी यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। जिसे आवंटित समितियों में भेजा जा रहा है। जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। किसान नियमानुसार समितियों से खाद ले सकते हैं। उन्होंने किसानों से जनसेवा केंद्रों में पहुंचकर फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील की है। ताकि, उन्हें आसानी से खाद मिल सके। बताया कि सहकारी समितियों से पहले समिति के सदस्यों को खाद का वितरण किया जाएगा। इसके बाद फार्मर रजिस्ट्री वाले किसानों को नकद के रूप में खाद दी जाएगी।