चरखारी बाईपास बनने की वजह से नई गल्ला मंडी में आढ़तियाें का धंधा मंदा पड़ गया है। वाहनाें को नई गल्ला मंडी तक पहुंचने में परेशानी हो रही है, जिसकी वजह से माल लदे वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। फसलें चौपट होने और सड़क बनने से नई गल्ला मंडी में किसान नहीं पहुंच रहा है। मंडी में चहल-पहल देखने को नहीं मिल रही है।
खेताें में कटाई के बाद अनाज लेकर किसान ट्रैक्टराें से नई गल्ला मंडी पहुंचते थे। एक महीना पहले परमानंद चौराहे से झलकारी बाई तिराहे तक चरखारी बाईपास के बनने से एक महीने से आवागमन ठप है।
हाल ही में नई गल्ला मंडी तक सड़क बनने के बाद दोपहिया वाहनाें के लिए सड़क खोल दी गई है। ट्रैक्टर और ट्रकाें के आवागमन पर रोक होने से लोगों मंडी पहुंचने के लिए खासा चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिसकी वजह से दूर दराज के किसान मंडी आने से कतरा रहे हैं।
हालत यह है कि इन दिनाें उपज लेकर मंडी जाने वाले किसानाें की संख्या 40 फीसदी कम हो गई है, जिसका खामियाजा आढ़तियाें को उठाना पड़ रहा है।
गल्ला आढ़ती टिंकू महाराज, मनोज शुक्ला, अरविंद कटारे, अतुल श्रोतीय, बशीर अहमद ने बताया कि पिछले वर्ष गल्ला मंडी में 250 से 300 ट्रैक्टर रोज आते थे। इन दिनाें 100 से 150 ट्रैक्टर ही आ रहे हैं।
चरखारी बाईपास बनने का असर माल भाड़े पर पड़ा है। गल्ला मंडी से खाद्यान्न लेकर कानपुर जाने वाले ट्रकाें के भाड़े में खासी वृद्धि हो गई है।
माल लेकर जाने वाले ट्रकाें को चक्कर लगाकर कानपुर जाना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने 50 रुपए से बढ़ाकर 70 रुपए प्रति क्विंटल भाड़ा कर दिया है। इसके अलावा ढुलाई करने वाले ठेलिया चालकाें ने भी भाड़ा बढ़ा दिया है।
शहर की नई गल्ला मंडी के मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने से जहां मंडी का कारोबार मंदा हो गया है, वहीं इसका सीधा फायदा बाजार में बैठे फुटकर आढ़तियाें को मिल रहा है। छोटे मोटे किसान मंडी जाने के बजाए बाजार में ही फुटकर आढ़तियाें को बेच रहे हैं।
फिलहाल बाईपास बनने से अभी पल्लेदाराें को भी नुकसान हो रहा है। दिहाड़ी पर मजदूरी कर कमाने खाने वाले पल्लेदार भी किसानाें के इंतजार में बैठे रहते हैं। किसानाें के माल को साफ करने, बोराें में भरने, खाली करने आदि में पल्लेदाराें व अन्य दिहाड़ी मजदूराें को काम मिलता था। लेकिन मंडी में सन्नाटा है।