उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के छह जिलों में फैले बुंदेलखंड को अलग राज्य घोषित किए जाने की मांग करीब दो दशक से की जा रही है। सोमवार को महोबा में शहीद राकेश चौरसिया की समाधि पर जाकर आज बुंदेलों ने प्रधानमंत्री को रिकार्ड 23वीं बार अपने खून से खत लिख मार्मिक अपील की है।
बुंदेलों ने कहा जिस तरह आपने कश्मीर से धारा 370 हटाकर एक ऐतिहासिक भूल को सुधारा, वैसे ही आप हमारा बुंदेलखंड राज्य वापस देकर उस ऐतिहासिक भूल को भी सुधारिए। जो 1 नवंबर,1956 को तत्कालीन नेहरू सरकार ने बुंदेलखंड को भारत के नक्शे से मिटाकर की थी।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि आज का दिन बुंदेलखंड के इतिहास का सबसे काला दिन है। आज ही नेहरू सरकार ने मध्यप्रदेश के गठन के लिए बुंदेलखंड राज्य की बलि दे दी। हिस्से को उत्तर प्रदेश में और आधे हिस्से को मध्यप्रदेश में बांट दिया। तभी से बुंदेलखंड दो राज्यों के बीच में पिस रहा है।
दोनों सरकारें अब खूबसूरत बुंदेलखंड को खनन हब बनाकर पूरी तरह से बर्बाद करने में लगी हैं। यहां के पहाड़, नदियां, जंगल व ऐतिहासिक विरासतें सब संकट में हैं। अगर हाईकोर्ट ने रोक न लगाई होती तो हीरे के लिए बुंदेलखंड का बक्सवाहा जंगल भी काट दिया जाता। महामंत्री अजय बरसैया ने कहा कि बुंदेलखंड को बचाने का एक ही समाधान है अलग राज्य निर्माण।
आज शहीद राकेश चौरसिया के भाई सुरेश, गया प्रसाद, अमरचंद विश्वकर्मा, हरिओम निषाद, पूर्व फौजी कृष्णा शंकर जोशी, पूर्व सभासद प्रेम साहू, अरूण तिवारी, सुरेश बुंदेलखंडी, सुरेन्द्र शुक्ला व देवेंद्र तिवारी समेत एक दर्जन बुंदेलों ने खत लिखने के लिए अपना खून दिया।