महोबा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे परियोजना निर्माण में लगे वाहनों की आवाजाही से करोड़ों रुपये लागत की सड़कें धराशाई हो गई। गड्ढों में तब्दील हुए विभिन्न गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों का अब फिर से कायाकल्प होने की उम्मीद जगी है। शनिवार को एक्सप्रेस-वे परियोजना की कार्यदाई संस्था यूपीडा और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की संयुक्त टीम टूटी सड़कों का सर्वे करेगी। जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।
जिले की सीमा से बनाए जा रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण पर है। चार साल से चल रहे एक्सप्रेस-वे निर्माण में लगी कार्यदाई संस्था यूपीडा के ठेकेदारों ने सड़क निर्माण में आपूर्ति के लिए सैकड़ों डंपरों से माल मंगाया। दिन-रात डंपरों की आवाजाही होने से चरखारी तहसील के महोबा-मुस्करा मार्ग, ऐचाना-गहरौली मार्ग, पच्छू डेरा-पुन्निया मार्ग, रिवई-कबरई मार्ग व खन्ना-ग्योड़ी मार्ग की सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण में चल रहे कार्य को देखने सात मई को आ रहे यूपीडा के तकनीकी अधिकारी जिले की खस्ताहाल सड़कों का लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ सर्वे करेंगे।
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रितेश वर्मा ने बताया कि चरखारी ब्लॉक से जुड़े गांवों की टूटी पांच सड़कों के पुनरुद्धार के लिए 6.60 करोड़ रुपये का मांग पत्र भेजा गया है, अन्य सड़कों के नुकसान का प्रांतीय और पीएमजेसीवाई ने मूल्यांकन कर भेजा है। शनिवार को यूपीडा के तकनीकी अधिकारी विभाग के साथ सर्वे करेंगे। उसके बाद इन सड़कों का फिर से कायाकल्प हो सकेगा।