जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र में प्राथमिक उपचार के अलावा अन्य सुविधाएं न मिल पाने से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। जिला अस्पताल में सस्ते दर पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन मशीन खराब रहने और मशीन सही होने के बाद ट्रेनिंग देकर बनाए गए रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर चले जाने के कारण चार महीने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा है। साल दर साल बढ़ती आबादी के हिसाब से सुविधाएं न बढ़ने से लोग बीमार होने पर प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेने को मजबूर है, वहीं अच्छे इलाज के लोगों को झांसी, ग्वालियर, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली जाना पड़ता है। जिले 060 फीसदी लोग ही जिला अस्पताल में उपचार के लिए जाते है। जबकि 40 प्रतिशत लोग जिला अस्पताल में इलजा न कराकर पाइवेट चिकि त्सकों की सलाह लेते है। जिला अस्पताल में उपकरणों की कमी, साफ सफाई और चिकित्सा की गुणवत्ता न होने से लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेना पड़ती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना जिला अस्पताल
दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार कर उन्हें मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया जाता है। जिससे नाजुक हालात में कई मरीज झांसी पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। वहीं मजबूरन लोगों को रेफर कराने के लिए लोगों को जिला अस्पताल लाना होता है।