जिले के लोगों के लिए मुसीबत बने अन्ना पशुओं का पुरसाहाल नहीं है। इनके सड़कों पर आवारागर्दी से लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। यह खेतों में खड़ी फसलों को चट कर जाते हैं। अन्ना पशुओं के खानपान और उनकी मदद के लिए समाजसेवी संस्थाए भी आगे नहीं आ रही हैं।
जिले में बड़ी तादाद में अन्ना पशु हैं। खाने का कोई इंतजाम न होने से यह खेतों में खड़ी फसल को चर डालते हैं। सूखे में मेहनत से तैयार की गई फसल के तबाह होने से किसान मुश्किल में हैं। पशु पालक मवेशियाें को दूध देने तक अपने पास रखते हैं। इसके बाद डंडा मारकर भगा देते हैैं।
भूसा चारा की किल्लत से भी पशुपालकों के लिए गैर दुधारू पशुओं को पालना वश की बात नहीं है। जिले में 3.64 लाख अन्ना पशु हैं। इनमें 1.36 लाख भैंस शामिल हैं। गाय और बछड़े भी हजारों की संख्या में छुट्टा घूम रहे हैं। जिले में बनी गौरक्षा समिति, समाजसेवी संस्थाएं और गौशाला संचालक भी अन्ना पशुओं की मदद के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।