सिंचाई विभाग के नीचे काम करने वाले यूपीपीसीएल बांदा कीरत सागर तालाब की ख्ुादाई का काम बेहद धीमी गति से किया जा रहा है। जिससे बरसात से पहले काम पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। दो माह गुजर जाने के बाद अभी तक 25 प्रतिशत भी तालाब की खुदाई नहीं हो पाई है। वहीं एक माह बाद बारिश शुरू होने की संभावना है। शासन की तालाब खुदाई की महत्वाकांक्षी योजना कैसे पूरी होगी इसे लेकर तरह तरह की कयासबाजी लगाई जा रही है।
शहर के ऐतिहासिक कीरत सागर तालाब की खुदाई कई दशकों से स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही थी। निरंतर मांग के बाद शासन ने सात करोड़ रुपये की लागत से प्राचीन तालाब की खुदाई की स्वीकृति दी गई थी । ताकि सैकड़ों साल पुराने इस प्राचीन तालाब की जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा सके। शासन ने सिंचाई विभाग के अधीन काम करने वाली यूपीपीसीएल बांदा को खुदाई का काम सौंप दिया, जिसमें पृथक-पृथक सात ब्लाकों में खुदाई का काम बांटा गया और सात करोड़ की लागत को सात भागों में बांटकर काम ठेकेदारों से दो माह पूर्व शुरू करा दिया गया। दो माह बीत जाने के बाद भी सात ब्लाकों के सापेक्ष केवल तीन ब्लाकों में ही काम शुरू हुआ है। चार ब्लाकों में कब तक काम शुरू होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 119 रुपये प्रति घनमीटर खुदाई की दरें निश्चित की गई हैं। शासन से एप्रोच लगाकर सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों ने महोबा के किसी भी विभाग को खुदाई का काम न दिलाकर बांदा के उप्र प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड यूनिट 15 बांदा को काम दिला दिया। अभियंताओं की लापरवाही के चलते अभी तक चार ब्लाकों में काम भी शुरू नहीं हो सका है और न ही अभी तक ख्ुादाई का सीमांकन हुआ है। उधर अधिशासी अभियंता यूपी पीसीएल मुकेश कुमार का कहना है कि हर हाल में बरसात के पहले अधिक से अधिक खुदाई का काम पूरा करा लिया जाएगा। दिन रात काम करने के निर्देश अधीनस्थ अभियंताओं को दिए गए हैं।
काम महोबा में आफिस बांदा में
महोबा। कीरत सागर की खुदाई का काम देख रही कार्यदायी संस्था का कार्यालय इंदिरा नगर बांदा में है और अधिशासी अभियंता लखनऊ में बैठते हैं यदा-कदा ही यहां अभियंता तालाब खुदाई का निरीक्षण करने आते हैं आखिर कैसे समय पर काम पूरा हो पाएगा, जबकि यूपीपीसीएल का एक कार्यालय महोबा में भी है जिसे इस काम से दूर रखा गया है।
जल स्रोत बंद होने से कैसे भरेगा तालाब
महोबा। कीरत सागर को बरसारत में भरने के लिए स्टेशन के पीछे यशोदा नगर से और मुकुंद लाल इंटर कालेज के पास से निकली नहर से बरसात का पानी तालाब को भरने में मुख्य भूमिका निभाता है। नहर पर जमी सिल्ट और जगह-जगह नहर लीकेज होने के कारण यहां से पानी पर्याप्त नहीं आ पाता। यशोदा नगर और आलमपुरा की ओर से बरसात के पानी का बहुत बड़ा हिस्सा तालाब में आता था। वहां चारों तरफ ऊंचाई बढ़ाकर मकान दर्जनों की संख्या में तालाब तटबंध पर बन गए हैं।