महोबा/चरखारी। झीलों के शहर के नाम से प्रसिद्ध रियासतकालीन कस्बा चरखारी में सौ साल पुराने द रॉयल थिएटर में एक बार फिर रंगमंच सजेगा। जर्जर हालत में पहुंच चुके रायल थियेटर की मरम्मत व साज-सज्जा का काम शुरू कर दिया गया है। इससे चरखारी का गौरवशाली अतीत फिर से जीवंत होगा।
साहित्यकार डॉ. शिवकुमार गोस्वामी बताते हैं कि चरखारी रियासत के आठवें महाराजा अरिमर्दन वर्ष 1925 में अपने गृहमंत्री याहिया अलवी के साथ कारनिथन थिएटर कलकत्ता में ड्रामा देखने के लिए पहुंचे। वहां उन्हें टिकट नहीं मिला और कंपनी मालिक व महाराजा के बीच वाद-विवाद हुआ। तब महाराजा ने पूरी कंपनी ही खरीद डाली। इसके बाद एक भव्य थिएटर हाल का चरखारी में निर्माण कराया। यह थिएटर हाल 125 फीट लंबा, 75 फीट चौड़ा और 60 फीट ऊंचा बनवाया। वर्ष 1925 में ही भारत के सबसे प्रसिद्ध नाटक लेखक आगा हश्र कश्मीरी को वह चरखारी लाए और उन्हें 1,500 रुपये प्रति माह व दैनिक खर्चाेंं के साथ स्टेट हाउस में रख लिया। वह वर्ष 1925 से 1928 तक चरखारी में रहे। महाराजा अरिमर्दन के शासनकाल में वर्ष 1941 तक रंगमंच सजा रहा। महाराजा ने थिएटर हाल परिसर में ही पॉवर हाउस का निर्माण कराया। जो थिएटर हॉल, कस्बे की स्ट्रीट लाइट, रियासतकालीन मंत्रियों और अधिकारियों के घरों को रोशन करता था। यह वह दौर था जब बुंदेलखंड के लोग रंगमंच व चरखारी की लाइट देखने के लिए आते थे। रियासत के विलय होने के बाद रंगमंच पर ग्रहण लग गया।
रंगमंच के कलाकारों को मिलेगा मंच
महोबा। द रायल थिएटर के संचालन की दोबारा उम्मीद जगी है। ऐसे में रंगमंच के कलाकारों को अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। नए कलाकार भी रंगमंच पर अभिनय की बारीकियां सीख सकेंगे। इससे रायल थिएटर उनके कॅरिअर को नया मुकाम देगा।
चार साल पहले तैयार हुआ था प्रस्ताव
महोबा। चार साल पहले तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार चरखारी पहुंचे थे। तब उन्होंने द रायल थिएटर को देखा था और उसका इतिहास जाना था। तब उन्होंने ने थिएटर हॉल की मरम्मत व रखरखाव के लिए इस्टीमेट तैयार कराया था। शासन स्तर से इसे स्वीकृति दी गई थी। अब रायल थिएटर की मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है।
थिएटर की मरम्मत व साज-सज्जा का काम कराया जा रहा है। एक माह में काम पूरा हो जाएगा। -अमरजीत, ईओ, नगर पालिका चरखारी, महोबा।
फोटो 13 एमएएचपी 09 परिचय-कस्बा चरखारी के रियासतकालीन इस थिएटर का जल्द शुरू होगा संचालन। संवाद