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जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से....

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महोबा। शहर के कृष्णा अमृत कल्याण मंडपम में शनिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दराज से आए कवियों ने रचनाओं के माध्यम से सभी का दिन जीत लिया। गीतकार हासिम फिरोजाबादी ने गीत जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए सुनाया। जिसे सुनकर पूरा ग्राउंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ बेसिक शिक्षा अधिकारी महेश प्रताप सिंह व नगर पालिका अध्यक्षा दिलाशा तिवारी ने दीप प्रज्जवलन के साथ किया। इसके बाद छतरपुर से आए कवि अभिराम पाठक ने रचना सूनी मांग करो न साजन समझौता हो जाएगा। जतारा टीकमगढ़ से आए कवि अनिल तेजस्व ने मै तो गीत लिखा करता हूं अपनी पावन माटी के, गीत लिखा करता हूं मै तो केशर वाली घाटी के रचना सुनाई। झांसी के कवि अर्जुन सिंह चांद ने चाहे न देना प्यार मुझे लेकिन न कोख में मार मुझे रचना सुनाई। इलाहाबाद से आए हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने सबको चिंता है अपने ही सम्मान की, जय हो जनता की जय हो हिंदुस्तान की रचना सुनाकर लोगों को खूब ठहाके लगवाए।
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कानुपर के कवि हेमंत पांडेय ने रचना देश का कुछ दर्द घटा बैठा हूं, कारगिल के युद्घ में अपने पैर कटा बैठा हूं सुनाई। कवियत्री हेमा बुखरिया ने रचना तुमने कायरता दिखलाकर सोते सैनिक मारे है, वे दुनिया से जीते से पर गद्दारों से हारे है। इसके अलावा साक्षी तिवारी, अजय मोहन तिवारी आदि कवियों ने भी रचनाएं पेश की। कार्यक्रम के दौरान जिले भर के ग्राम प्रधानों और समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. जगप्रसाद तिवारी ने की जबकि संचालन अशोक सुंदरानी ने किया। इस मौके पर संयोजक देवेंद्र चतुर्वेदी, सह संयोजक मनीष सोनी, सौरभ तिवारी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से....
- अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दूर दराज के कवियों ने बांधा समां
- कार्यक्रम में ग्राम प्रधानों और समाजसेवियों को किया गया सम्मानित
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