महोबा। जिले में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी मजबूत हैं, इसका खुलासा जिले में अब तक हुई कार्रवाई बता रही है। दस साल के अंदर 17 अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। इसके बाद भी अधिकारी व कर्मचारी पीड़ितों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
दस अगस्त 2016 को विजिलेंस टीम लखनऊ ने तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी रामेश्वर प्रसाद को 50 हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा था, जो जिले में भ्रष्टाचार से जुड़ा पहला मामला था। इसके बाद चार अगस्त 2017 को झांसी की एंटी करप्शन टीम ने विनिमित क्षेत्र के अवर अभियंता घसीटा सिंह को पांच हजार रुपये, इसी माह 29 अगस्त 2017 को सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक प्रदीप कोफर्ड को 15 हजार, चार मार्च 2018 को सहायक उद्यान अधिकारी नारायण दोहरे को 12 हजार, 27 जून 2018 को औषधि निरीक्षक रमेशलाल गुप्ता को 45 हजार, 19 सितंबर 2018 को लेखपाल अखिलेश को पांच हजार, अगले ही दिन 20 सितंबर को विजिलेंस लखनऊ ने आबकारी विभाग के सहायक कमिश्नर अरविंद सोनकर को 10 हजार, फरवरी 2019 में पीडब्ल्यूडी के लिपिक विष्णु सोनी को 10 हजार, अप्रैल 2019 में आरईएस के जेई लाखन सिंह को 10 हजार, जून 2019 में बिजली विभाग के बिल बाबू श्यामजीत को 10 हजार, 17 अगस्त को 2021 को विजिलेंस झांसी ने जिला उद्यान अधिकारी श्याम सिंह को 50 हजार, आठ सितंबर 2022 को डीपीआरओ कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक वैभव मिश्रा को 15 हजार रुपये, 15 मार्च 2024 को अजनर बैंक प्रबंधक वैभव खरे को सात हजार, 11 जून 2024 को सतारी लेखपाल देवेंद्र राजपूत को 10 हजार रुपये, 24 दिसंबर 2025 को संग्रह अमीन केके साहू को दस हजार रुपये व 19 मार्च 2026 को सीएमओ कार्यालय में तैनात परिवार कल्याण प्रोजेक्ट मैनेजर जितेश सोनी को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा जा चुका है। एक माह बाद ही अब कानूनगो ओमप्रकाश निगम को एंटी करप्शन टीम बांदा ने पांच हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है।