महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए आल्हा चौक में चल रहे ऐतिहासिक अनशन के 260 दिन पूरे होने पर रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवि लखनलाल चौरसिया ने राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए अपनी रचना ‘दल के टुकड़े टुकड़े करके दल बदलकर चल दिए’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कवि विष्णुरात चतुर्वेदी ने की जबकि संचालन बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने किया। कार्यक्रम में विष्णुरात चतुर्वेदी ने ‘विश्व का तीर्थ है भारत और भारत का तीर्थ है बुंदेलखंड’ रचना प्रस्तुत कर अतुल्य बुंदेलखंड का खूबसूरत चित्रण किया। मशहूर गीतकार हरिश्चंद्र वर्मा ने वीरभूमि के वीर सपूतों, अब न देर लगाओ, इस धरती का कर्ज चुकाने की खातिर आ जाओ गीत सुनाकर तालियां बटोरीं। राजू पंडा बुंदेली ने अपनों बुंदेलखंड न्यारौ, लगे हमें प्रानन से प्यारौ गीत प्रस्तुत किया। साहित्यकार राम प्रकाश पुरवार ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचना देश के नेताओं के बेटे फौज में क्यों नहीं जाते सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
युवा कवि संतोष धुरिया ने उन आंखों की दो बूंदों से समुंदर भी हारे होंगे, जब मेंहदी वाले हाथों से मंगलसूत्र उतारे होंगे रचना सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। वीरभूमि डिग्री कालेज के प्रो. एलसी अनुरागी ने अलग बुंदेलखंड राज्य है बनवाने, विकास हमें है करवाने बुंदेली गीत प्रस्तुत किया। इनके अलावा रामेश्वर चौरसिया, डा. रामसेवक चौरसिया, डा. प्रभुदयाल, जीजीआईसी की प्रधानाचार्य सरगम खरे आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी। पंचकुला की कवित्री ज्योति वर्मा द्वारा भेजी गई रचना ‘बुंदेले हरबोलों की मर्दानी आज फिर ललकारती’ संचालक तारा पाटकर ने पढ़कर सुनाई।
दल के टुकड़े टुकड़े करके दल बदल कर चल दिए....