महराजगंज। कबड्डी और खो-खो के कोच न होने से इन खेलों के प्रतिभागी रुचि होने के बाद भी दक्षता से वंचित रह जा रहे हैं। निजी प्रयास से इन खेलों में मंडल स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद भी राज्य स्तर पर कमजोर प्रदर्शन इसे साबित भी कर रहा है, लेकिन फिर भी उक्त खेलों के लिए कोच तैनाती का प्रयास नहीं हो रहा है।
कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों में युवा स्वयं अभ्यास करते हैं, लेकिन खेल के प्रति उनका यह जुनून कोच (मार्गदर्शक) के अभाव में दम तोड़ देता है। वालीबॉल के खेल को बढ़ावा देने के लिए जिले में प्रयास न के बराबर हो रहे हैं।
इस खेल के लिए न तो सरकारी तौर पर कोई सुविधा ही मिल पाती है और न आगे बढ़ने के लिए किसी कोच का मार्गदर्शन ही मिल पाता है। यही कारण है कि इन खेलों में रूचि रखने वाले युवा इस खेल के शौक के बूते अपना कॅरिअर नहीं बना पा रहे हैं।
बागापार में कुश्ती के राष्ट्रीय पहलवान श्यामकरन यादव, मंडल केसरी जितेंद्र चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं का रुझान कबड्डी और खो-खो में अधिक रहता है। अगर इनके कोच मिल जाएं तो निश्चित तौर पर इन खेलों में बड़ा मुकाम तय किया जा सकता है।