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Maharajganj News: मुआवजे के फेर में अटका काम...किसान भी परेशान

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पहले चरण में प्रभावित किसानों को 4.52 अरब रुपये मुआवजा वितरित
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दो माह बीतने के बाद भी मुआवजा निर्धारण करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से 300 किसान परेशान
महराजगंज। प्रस्तावित घुघुली-महराजगंज-आनन्दनगर रेल लाइन निर्माण परियोजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। परियोजना के दायरे में आने वाले 14 गांवों का अंतिम गजट नोटिफिकेशन पहले ही जारी किया जा चुका है। दो माह बीतने के बाद भी मुआवजा निर्धारण करने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं होने से 14 गांवों के करीब 300 से किसान परेशान हैं।
जानकारी के अनुसार, घुघली से महराजगंज होते हुए आनन्दनगर तक प्रस्तावित यह नई रेल लाइन कुल 52.70 किलोमीटर लंबी है। यह परियोजना जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके पूरा होने से क्षेत्र में यातायात सुविधाओं का विस्तार होगा, व्यापार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। लोगों को रेल यात्रा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। रेल लाइन का निर्माण कार्य दो चरणों में प्रस्तावित है। पहले चरण में 29 गांव और दूसरे चरण में 23 गांव शामिल हैं। रेलवे और भूमि अध्याप्ति विभाग के मुताबिक, पहले चरण के अंतर्गत आने वाले 29 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इन गांवों के प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित करने का कार्य जारी है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक पहले चरण में प्रभावित किसानों को कुल 4.52 अरब रुपये की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है। साथ ही इन क्षेत्रों में रेल लाइन निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। दूसरे चरण में कुल 23 गांव प्रस्तावित हैं। इनमें से 9 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। इन गांवों में रुद्रापुर, रम्हौली, कांध, रुदौली भावचक, रामनगर, पकड़ी नौनिया, जंगल दुधई उर्फ चेहरी, पिपरा रसूलपुर और सिसवा अमहवा शामिल हैं। भूमि अध्याप्ति विभाग के अनुसार, इन 9 गांवों में अब तक 1.03 अरब रुपये का मुआवजा किसानों को दिया जा चुका है।
शेष 14 गांव ऐसे हैं, जहां भूमि अधिग्रहण के लिए अंतिम गजट नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है, लेकिन मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इन गांवों में खजुरिया, महदेवा, गोबिंदपुर, गोपालापुर, खनुआ, परसिया बुजुर्ग, देउरवा, जंगल जोगिया बारी, अलहदिया महदेवा, गोपालापुर, कम्हरिया बुजुर्ग, सेमराडाड़ी, मथुरा नगर और सिधवारी शामिल हैं। इन गांवों के किसान लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
जंगल जोगिया बारी गांव के किसान नारद मुनि ने बताया कि रेल लाइन के दायरे में उनकी लगभग 33 डिसमिल जमीन आ रही है। रेलवे विभाग की ओर से जमीन को चिह्नित कर सर्वे भी किया जा चुका है लेकिन मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। जमीन जाने के बाद वे किस तरह परिवार का पालन-पोषण करेंगे, यह चिंता सता रही है। इसी गांव के किसान वीरेंद्र ने बताया कि उनकी करीब 20 डिसमिल जमीन रेल लाइन परियोजना में जा रही है। वह लंबे समय से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि खेती की जमीन अधिग्रहण में चली जाने से आय का बड़ा स्रोत समाप्त हो जाएगा। मुआवजा मिलने में हो रही देरी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है। कई बार भूमि अध्याप्ति कार्यालय में जाकर जानकारी ली लेकिन हर बार यही बताया गया कि अवार्ड अभी तक नहीं बना है।

वर्जन
जिन 14 गांवों में अंतिम अधिसूचना जारी की गई है, वहां किसानों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। यदि किसी किसान की जमीन सर्वे में किसी कारणवश छूट गई हो या किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो तो वह आपत्ति कर सकता है।
-नंद प्रकाश मौर्य, भूमि अध्याप्ति अधिकारी
कोट
करीब 57 डिसमिल जमीन परियोजना के दायरे में आ रही है। रेलवे विभाग की ओर से भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे कर जमीन चिह्नित की जा चुकी है, लेकिन अब तक मुआवजा निर्धारण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। मुआवजे की जानकारी के लिए जब भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचा तो बताया गया कि अभी तक अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों का अवार्ड तैयार नहीं हुआ है।
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प्रेम सहानी, जंगल जोगिया बारी

मेरी 45 डिसमिल जमीन परियोजना के दायरे में आ रही है। जमीन चिह्नित करने के बावजूद मुआवजा नहीं मिल सका है। न तो रेलवे विभाग और न ही भूमि अध्याप्ति विभाग की ओर से खेत से संबंधित कोई आवश्यक प्रपत्र लिया गया है। विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिख रही है।
-अंबिका यादव, जंगल जोगिया बारी
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