निचलौल। स्वावलंबन की चाहत में निचलौल शहर से महज कुछ ही दूरी पर स्थित बनकटवा गांव की महिलाएं रेशम का कीट पालन और कोकून उत्पादन से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। कोकून की बदौलत इस गांव की तकरीबन एक दर्जन से अधिक महिलाओं की जिंदगी बदल गई है।
राजकीय रेशम फॉर्म निचलौल के गांव बनकटवा के साथ ही राजकीय रेशम फॉर्म डोमा, श्रीनगर, चमइनियां और सिंदुरिया से जुड़े विभिन्न गांवों की महिलाएं कोकून उत्पादन कर रही हैं। उन्हें विभाग की ओर से सहयोग भी मिल रहा है। ऐसे में यहां रेशम कीट पालन और कोकून उत्पादन एक नए रोजगार के रूप में उभर रहा है।
शहर से सटे सिसवा रोड स्थित बनकटवा में एक दर्जन से अधिक महिलाओं की ओर से रेशम कीट पालन व कोकून उत्पादन का कारोबार पिछले एक साल से शुरू किया गया है, जो अब रंग दिखाने लगा है।
राजकीय रेशम फॉर्म निचलौल पर तैनात कर्मी हुक्म से मिली जानकारी मुताबिक, रेशम फॉर्म करीब पांच एकड़ में फैला हुआ है। इससे जुड़े बनकटवा गांव की सुशीला, मरजादी, अमरावती, उदासी, शांति, धानमति, रामरती सहित अन्य महिलाएं कोकून तैयार करने में जुटी हैं। इन दिनों बनकटवा की महिलाओं की ओर से लगभग डेढ़ क्विंटल कोकून तैयार किया गया है। यहां तैयार होने वाले कोकून की डिमांड पश्चिम बंगाल, कश्मीर, बैंगलोर, बनारस और देहरादून में बढ़ गई है। इन जगहों के रेशम सूत व्यापारी यहां आकर तैयार होने वाले कोकून ले जा रहे हैं।