निचलौल। खरपतवारों का अगर समय से नियंत्रण नहीं किया गया तो गन्ने की उपज 40 फीसदी कम होता जाता है। गन्ने की सफल की बेहतर पैदावार के लिए समय-समय पर खरपतवार निकालते रहे। खरपतवार गन्ने की फसल को सबसे अधिक नुकसान बोने के 100 से 120 दिनों तक करते हैं।
यह जानकारी गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र गोरखपुर के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने दी। सहायक निदेशक ने बताया कि गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख खरपतवार जैसे दूब, मोथा, बथुआ, मकोय, हिरनखुरी, पथरचटा आदि है। खरपतवार गन्ने की दो नाली के बीच खाली स्थान का भरपूर उपयोग करता है। इतना ही नहीं घास किसान की ओर गन्ने में डाले गए उर्वरक का चार गुना नत्रजन, जबकि तीन गुना फास्फोरस और ढाई गुना पोटाश का उपयोग करता है।
खरपतवार सिंचाई और प्रकाश का सर्वाधिक उपयोग कर गन्ना फसल को अधिकांश नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में खरपतवारों पर नियंत्रण करने के लिए किसान एक खेत में लगातार कई वर्षों तक गन्ना न बोये, फसल चक्र अपनाएं, गन्ने की दो पंक्तियों के बीच अपनी सुविधानुसार मूंग, उर्द, लोबिया, ढैंचा, आलू, प्याज, धनिया, गोभी, टमाटर आदि की सहफसली खेती करें, जिससे खरपतवारो का संघर्ष कम हो जाएगा।
गन्ने की दो पंक्तियों के बीच गर्मी के दिनों में फावड़ा, रोटावेटर, पावर टीलर से गुड़ाई करें या गन्ने की दो पंक्ति के बीच गन्ने की सुखीपत्ती बिछा दें। इससे खरपतवार काफी नियंत्रण होगा। यह सड़कर जैविक खाद भी बन जाएगा। अगर मजदूरों का अभाव रहे तो रसायन का छिड़काव करें। सिंचाई के बाद प्रति एकड़ खेत में ट्राईजोम 450 ग्राम, पानी 450 लीटर या रक्षक 115 मिली के साथ एट्राजीन 500 ग्राम को 150 लीटर पानी या वरडिक्ट 200 ग्राम व एक लीटर क्रास को मिलाकर 120 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।