महराजगंज। जिले में लगातर बारिश से नगर के कई इलाकों में लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
लगातार 24 घंटे की बारिश के बीच अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को अधिकतम तापमान 26 तो न्यूनतम 24 डिग्री रिकाॅर्ड किया गया। घने बादल छाए रहने के कारण दृश्यता का ग्राफ जहां कम रिकाॅर्ड हुआ, वहीं लुढ़के तापमान के बाद चली हवा से लोगों ने कंपकंपी महसूस की।
विभिन्न वार्डों से पानी निकाल रही नगर पालिका: लगातार बारिश के कारण नगर निकाय के विभिन्न वार्डों में आने जाने वाले मार्गों पर पानी चढ़ गया है। साथ ही कई मोहल्लों में सड़क किनारे बनी नाली व सड़क दोनों का लेबल समान हो गया है।
महराजगंज नगर पालिका परिषद के सिविल लाइंस, कोतवाली परिसर, धनेवा- धनेई, पड़री, जिला अस्पताल परिसर में पानी लग चुका है। नगर पालिका के ईओ ने बताया कि सिविल लाइन व अस्पताल परिसर से जल निकासी के लिए पंपिंग सेट लगाए गए हैं। जहां से सूचना मिल रही वहां सफाईकर्मियों की टीम भेजकर जल निकासी व्यवस्था बनाई जा रही है।
लौटते मानसून ने जनपद के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बीत 24 घंटे से लगातार हुई बारिश के कारण अर्ली वेरायटी की धान फसल जहां खेत में लेट गई है, वहीं पछेती में लगा पानी विकास प्रभावित कर सकता है।
मौसम विभाग ने 63 एमएम बारिश 24 घंटे में रिकॉर्ड की है। सर्वाधिक बारिश निचलौल और नौतनवां तहसील क्षेत्र में रिकाॅर्ड की गई। इन्ही तहसील क्षेत्रों में अर्ली वेरायटी की धान की फसल अधिक थी, जिसके खेत में लेटने से उत्पादन प्रभावित होना तय है।
लौटते मानसून की राह में बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब ने पूर्वी यूपी में मानसून को सक्रिय कर दिया है। 24 घंटे से जिले में लगातार हो रही बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद होने की जगह नुकसान पहुंचाती दिख रही है।
खरीफ सीजन की बात करें तो जनपद में 1.50 लाख हेक्टेयर पर धान की फसल है। इस बार उर्वरक की किल्लत के कारण कुछ क्षेत्रों की रोपाई में विलंब हुआ, लेकिन नौतनवां और निचलौल क्षेत्र जहां नहर से सिंचाई सुविधा वहां अर्ली वेरायटी की धान फसल में बालियां आने के बाद दाना बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, लेकिन भारी बारिश व हवा के कारण फसल खेत में ही लेट गई है।
मौसम ठीक होने के बाद की स्थिति पर यह निर्भर होगा कि गिरी धान फसल से कुछ उत्पादन संभव है अथवा नहीं। वहीं पछेती फसल के लिए कृषि विभाग इसे बहुत खराब नहीं मान रहा, लेकिन जिन खेतों में पानी लग गया है वहां की फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को पानी निकालने का बंदोबस्त करने के लिए निर्देश विभाग की तरफ से जारी किए हैं।
नकदी खेती मानी जाने वाली केले की खेती को भी सिसवां बाजार और घुघली बेल्ट में नुकसान होने की बात कही जा रही, जिसमें केला आ चुका था। बारिश व हवा का प्रतिरोध करने में केले के पौधे आधी लंबाई से टूट गए या जमीन पर पसर गए। हालांकि कृषि विभाग का मानना है कि बड़े पैमाने पर नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन कुछ नुकसान जरूर हुआ है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार जिले में धान लेट है, जिसके कारण अभी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जहां शीघ्र पकने वाली प्रजाति है वहां नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया हो वह क्लेम कर सकते हैं। मौसम ठीक होने पर नुकसान का आकलन होगा।