महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण अगले साल पूरा होगा। इसके लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। वहीं दर्जिनिया ताल पर बटरफ्लाई पार्क बनने का सपना अधूरा है।
करीब 22 हजार स्क्वायर मीटर में लेपर्ड (तेंदुआ) रेस्क्यू सेंटर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। पशु अस्पताल, पांच तेंदुओं के संरक्षण और संवर्धन की सुविधा शुरू होने में वक्त लगेगा। वहीं बटर फ्लाई पार्क का प्रस्ताव फाइलों में सिमट कर रह गया है।
जानकारी के अनुसार, मधवलिया वन रेंज क्षेत्र के मधवलिया गेस्ट हाउस के उत्तर तरफ लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण तेजी से चल रहा है। लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का संचालन अगले साल सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा।
4.99 करोड़ रुपये खर्च कर पांच तेंदुए या टाइगर के संरक्षण के साथ ही इसमें लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर में हॉस्पिटल, पोस्टमाटर्म हाउस, अंत्येष्टि स्थल का कार्य पूर्ण हो चुका है। ऐसे में रेस्क्यू सेंटर का ज्यादातर हिस्सा बनकर तैयार हो गया है।
फिलहाल दूसरे चरण में डॉक्टरों के रहने के आवास सहित अन्य भवनों का निर्माण अंतिम चरण में है। चहारदीवारी भी हो चुकी है। उधर, निचलौल वन रेंज के दर्जिनिया ताल पर वर्ष 2019 में 80 लाख की लागत से करीब 50 डिस्मिल जमीन पर पर्यटकों के लिए पूर्वांचल का पहला बटरफ्लाई पार्क बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार हुआ था।
इस प्रस्ताव में तकरीबन 70 मीटर इंटरलॉकिंग सड़क बननी थी। जहां पर्यटक आराम से टहलकर सैकड़ों प्रजाति के रंग-बिरंगी तितिलियों को देख लुप्त उठा सके। वहीं पार्क में इंट्री गेट, वाक ट्री सहित अनेक प्रजाति की प्लांट भी लगाना था।
यह पूरी कार्ययोजना पर्यटकों को आकर्षक करने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन करीब पांच वर्ष बीतने के बाद भी योजना विभाग के दफ्तरों से बाहर नहीं निकल सकी। हालांकि दर्जीनिया ताल पर वर्तमान की हालत यह है कि जिम्मेदारों की लापरवाही और मनमानी के चलते पर्यटकों की संख्या में काफी हद तक गिरावट आ चुकी है।ॉ