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Maharajganj News: वनटांगिया गांव में एक जगह हो सकेंगी ग्रामीणों की जमीनें, शासन ने मांगा ब्यौरा

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चकबंदी बंदोबस्त श्रेणी 5क को बदलने की 9 वर्ष से हो रही है मांग
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शासन स्तर से सामूहिक अधिकार प्रपत्र, खेती व आवासीय भूमि की पत्रावली तलब
महराजगंज। देश की आजादी के 79 वर्ष बाद भी सूबे के 13 जिले में रह रहे वनटांगिया समुदाय के लोग जरूरत पड़ने पर अपनी जमीनों को बेच भी नहीं सकते हैं। ग्रामीण नौ वर्षों से मांग कर रहे हैं कि तकनीकी समस्या को दूर कर और चकबंदी प्रक्रिया को लागू उन्हें उनकी जमीनें को एक जगह पर दी जाएं। शासन ने वनटांगिया आबादी की जमीनों का विवरण तलब किया है। इससे ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि जल्दी ही उनकी मांग पूरी हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, शासन ने अगस्त माह तक सभी वनटांगिया आबादी वाले जनपदों से वनटांगिया गांव को दिया गया सामूहिक अधिकार पत्र और वनटांगिया जिन जमीनों पर काबिज हैं वह आवासीय एवं कृषि भूमि की अलग-अलग पत्रावलियां तलब की हैं। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चर्चा है कि इस बार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ वनटांगिया समुदाय को दीपावली का तोहफा (श्रेणी 2) में उनके कब्जे की जमीनों की तब्दीली का निर्णय दे सकते हैं।
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उम्मीद है कि वनटांगिया समुदाय के लिए 2026 की दीपावली खास होने वाली है। इस बार नवंबर में पड़ने वाली दीपावली लगातार 17वीं ऐसी दीपावली होगी जिसे वनटांगिया समुदाय सूबे के मुखिया संग मनाएगा। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के पांच वनटांगिया गांव के ग्रामीणों के साथ दीपावली मनाते हैं। यह समुदाय 2017 से पहले तक अधिकार व जमीनों के मालिकाना हक से वंचित थे।
सांसद रहने के दौरान से योगी आदित्यनाथ 2009 से इस समुदाय के लोगों संग दीपावली मनाते हैं। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वनटांगिया गांव में सफाई, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई हैं। इस वजह से वनटांगिया समुदाय का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। 2017 से पहले तक इनके पास कुछ नहीं था।
जिन जमीनों पर यह बसे या खेती करते थे उस पर वन विभाग का अधिकार था लेकिन 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने इन जमीनों का न सिर्फ मालिकाना हक दिलाया बल्कि मताधिकार देकर इनके गांव को आसपास की पंचायतों में जोड़कर विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के प्रयासों से महराजगंज के वह 18 गांव जो कभी गुमनामी के अंधेरे में थे उन्हें आसपास की पंचायतों से जोड़कर विकसित किया गया।
वनटांगिया समुदाय के लोग अलग ग्राम पंचायत बनाने व वनटांगिया समुदाय की सभी जमीन की मिल्कियत चकबंदी बंदोबस्त की श्रेणी 5क करने की जगह श्रेणी 2 करने की मांग कर रहे हैं। जिससे उनकी जमीन जो कई-कई गांव तक फैली एक जगह चकबंदी में लाई जा सके। अभी अलग पंचायत का दर्जा तो नहीं लेकिन श्रेणी 2 का दर्जा देने के लिए उन जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई जहां वनटांगिया समुदाय की आबादी है।
जनपद के 18 गांव में 35 हजार वनटांगिया
वनटांगिया विकास समिति के सरपंच जयराम बताते हैं कि जनपद में ही 18 गांव में वनटांगिया समुदाय के करीब 35 हजार के लोग रहते हैं। इसके अलावा 12 जिले लखीमपुर, बलरामपुर, बहराइच, गोरखपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, ललितपुर, चित्रकूट, चंदौली, गोंडा, सहारनपुर और बिजनौर में भी वनटांगिया निवास करते हैं। इन सभी जिलों के जिलाधिकारियों से इसी माह में वनटांगिया समुदाय का सामूहिक अधिकार प्रपत्र व आवासीय एवं कृषि क्षेत्र की जमीन की श्रेणी निर्धारण के लिए अलग-अलग पत्रावली उपलब्ध करना के आदेश दिए गए हैं।
समाज कल्याण अधिकारी ने भेजा पत्र
समाज कल्याण अधिकारी महराजगंज विपिन यादव ने बताया कि आदेश के क्रम में समाज कल्याण विभाग ने सभी वनटांगिया गांव की पत्रावली तैयार करा ली है। कुल 1800 हेक्टेयर भूमि (आवासीय व कृषि भूमि) वनटांगिया लोगों की जनपद में हैं। सदर व निचलौल के एसडीएम को पत्र भेजकर वनटांगिया गांव बजहां व अहिरौली वनटांगिया गांव की पत्रावली न मिलने के कारण शासन को पत्रावली भेजने में देरी होने की सूचना एडीएम को दे दी है। वहीं इन दोनों एसडीएम को पत्रावली यथाशीघ्र उपलब्ध कराने का पत्र भी भेजा गया है।
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वर्जन
शासन को वनटांगिया समुदाय का सामूहिक अधिकार प्रपत्र, आवासीय एवं कृषि अधिकार की पत्रावली भेजनी है। इसकी तिथि शासन से 31 अगस्त निर्धारित है। समाज कल्याण अधिकारी को पत्रावली तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। चकबंदी से जुड़ी यह पत्रावलियां भूमि श्रेणी परिवर्तन के लिए ही मांगी जाती हैं।
- डॉ. प्रशांत कुमार, एडीएम, महराजगंज
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