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Maharajganj News: यूपी बोर्ड ने वेतन के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी किया अनिवार्य

Wed, 25 Jun 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। कम नामांकन पर परिषदीय स्कूलों को विलय आदेश को लेकर बेसिक के शिक्षक विरोध कर रहे हैं, वहीं अब यूपी बोर्ड की शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्यता को लेकर घमासान मच गया है। जुलाई माह का वेतन माध्यमिक शिक्षक तभी आहरित कर सकेंगे जब वेतन आवेदन के साथ पूरे माह उपस्थिति का प्रिंट आउट संलग्न करेंगे।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद ने आदेश पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय प्रेषित किया है जिसमें बायोमेट्रिक प्रक्रिया की स्कैम कापी लेकर ही वेतन जारी करने के निर्देश हैं। इस महीने का वेतन तो जुलाई में शिक्षक प्राप्त कर लेगे, लेकिन जुलाई में कार्य करने की बायोमेट्रिक प्रति लगाने पर ही भुगतान दिया जाएगा।
इस आदेश को दो चरणों में प्रभावी करने की तैयारी स्थानीय स्तर से शुरू कर दी गई है। 278 माध्यमिक स्कूलों के पहले चरण में 29 राजकीय स्कूलों में तैनात 170 शिक्षकों पर लागू किया जा रहा है। इनके लिए बायोमेट्रिक मशीन की खरीद प्रोजेक्ट अलंकार की मदद से की जाएगी।
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वहीं शेष बचने वाले स्ववित्तपोषित स्कूलों को बायोमेट्रिक मशीन की खरीद अपने स्तर से ही करनी होगी। डीआईओएस कार्यालय से इसके लिए प्रधानाचार्य व प्रबंधकों को निर्देश पत्र जारी कर दिए गये हैं।
छात्रवृत्ति में भी मिलेगा लाभ
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सूत्रों की माने तो यह पूरा मामला व आदेश बच्चों की उपस्थिति तय करने के लिए हो रही है जिसकी शुरुआत शिक्षकों के जरिये यूपी बोर्ड ने की है। पिछले वर्ष समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति का प्रारूप भी जोड़ दिया है, लेकिन किसी भी माध्यमिक स्कूल में बायोमेट्रिक व्यवस्था न होने पर जैसे तैसे प्रक्रिया पूरी हुई। व्यवस्था न होने का खामियाजा कुछ आवेदकों को भी झेलनी पड़ी और छात्रवृत्ति से वंचित रहना पड़ा। छात्रवृत्ति आवेदन में एक बार फिर जरूरत होगी। इसके मद्देनजर विभाग बायोमेट्रिक व्यवस्था शिक्षकों से प्रारंभ कर रहा जिसमें आगे चलकर विद्यार्थी भी जुड़ेंगे।
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वेतन के लिए बायोमेट्रिक अनिवार्य किया गया है। पहले चरण में 29 राजकीय स्कूलों में इसे प्रभावी किया जाएगा। बायोमेट्रिक मशीन के लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। स्ववित्तपोषित स्कूलों को व्यवस्था खुद करनी होगी। इस प्रक्रिया से माध्यमिक शिक्षा में सुधार होगा और बिना अवकाश स्वीकृति के शिक्षक स्कूल नहीं छोड़ सकेंगे। प्रदीप कुमार शर्मा, डीआईओएस
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