- रैनकट और रेटहोल से बांध की हालत दयनीय, मरम्मत के नाम पर प्रतिवर्ष होते हैं करोड़ों रुपये खर्च
फरेंदा। मानसून आने में कुछ दिन बाकी है। जिले में बांधों की मरम्मत के नाम पर खानापूरी की गई है। जर्जर बांधों से लोगों को बाढ़ के खतरे को लेकर दहशत बना हुआ है। क्षेत्र का त्रिमुहानी बांध जगह-जगह रैनकट के कारण कमजोर दिख रहा है। लोगों का कहना है कि बाढ़ आई तो क्षेत्र के करीब 15 गांव डूब जाएंगे। बांध की मरम्मत को लेकर भी विभाग उदासीन है।
फरेंदा क्षेत्र के रोहिन नदी के किनारे त्रिमुहानी बांध की लंबाई करीब आठ किलोमीटर की है। बांध जर्जर हालत में है। कई जगहों पर रैटहोल व रेनकट के कारण बांधों की स्थिति दयनीय है। मरम्मत के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन बांधों के हालत में कोई खास सुधार नहीं रहता है।
त्रिमुहानी बांध के किनारे बसे गांव झांवाकोट, भगवानपुर, रामनगर, हरैया, जलालगढ़, बरगदवां, पंडितपुर, बहादुरगढ़, गढ़वा, भैसहिया सहित कई गांव बसे हुए है। बांध की स्थिति काफी खराब है। वाहनों के गुजरने के कारण भी बांध जगह-जगह टूटा गया है।
वर्ष 2007 व वर्ष 2017-18 में आई बाढ़ से किसानों का काफी नुकसान हुआ था। क्षेत्र के लोगों में रजिंद्र यादव, जगदंबा यादव, बाढ़क, शिवनाथ व लाल बहादुर सहित तमाम लोगों ने बताया कि बांध की मरम्मत समय से नहीं हुआ तो बाढ़ आने पर कई गांव डूब जाएंगे। फसलें बर्बाद हो जाएंगी। इससे लोगों का काफी नुकसान होगा। मानसून आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन बांधों की मरम्मत शुरू नहीं हो सकी है। लोगों ने शासन से बांध की मरम्मत कराने की मांग की है।
बांध की हालत खराब है। जगह-जगह बांध से मिट्टी बारिश में बह गई है। मानसून आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। बांधों की हालत में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। अगर बाढ़ आई तो बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों को काफी नुकसान होगा। मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूरी किया जाता है।
-अमरजीत यादव, भैसहिया
बांध की मरम्मत कई वर्षों से ठीक से नहीं हुआ है। बरसात के कुछ दिन पूर्व बांध पर जहां रैनकट व रेटहोल रहता है। वहां पर बाेरे में मिट्टी भरकर कार्य को पूरा करा दिया जाता है। मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च के बाद कोई सुधार नहीं रहता है।
- अरविंद यादव, रामनगर
त्रिमुहानी बांध में रेटहोल और रैनकट जल्द भर दिया जाएगा। मानसून से पहले ही इसकी मरम्मत करा ली जाएगी ताकि बरसात के मौसम में कोई दिक्कत न हो। -जितेंद्र कुमार पटेल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग द्वितीय